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सत्य निकेतन हादसे में किरण बेदी को पक्षकार बनाने पर केंद्र सरकार ने जताया विरोध

पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने सत्य निकेतन बिल्डिंग ढहने से जुड़ी जनहित याचिका में अपना नाम पक्षकार के रूप में दर्ज कराना चाहा, जिस पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई। दिल्ली हाई कोर्ट ने उनके व्यापक अनुभव को केस में उपयोगी बताया और सरकार को आपत्तियां पेश करने के लिए तीन दिन का समय दिया। अदालत ने इस दुर्घटना को साधारण घटना नहीं, बल्कि लापरवाहियों के कारण हुई त्रासदी कहा।

17 सितंबर 2026 को 08:05 am बजे
सत्य निकेतन हादसे में किरण बेदी को पक्षकार बनाने पर केंद्र सरकार ने जताया विरोध

सौजन्य से:- Hindustan

किरण बेदी भी सत्य निकेतन हादसे पर पहुंच गईं अदालत, केंद्र सरकार ने किया विरोध

दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका में पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को पक्षकार बनाए जाने का केंद्र सरकार ने विरोध किया है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे से जुड़ी जनहित याचिका में खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। इसका केंद्र सरकार ने विरोध किया है। हाई कोर्ट में सरकार का तर्क है कि मामले में वह अपनी राय पहले ही बना चुकी हैं। अदालत ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। बता दें कि सत्य निकेतन इलाके में पीजी इमारत के गिरने से पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत हो गई थी। इमारत काफी जर्जर थी और नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए इमारत में मंजिलें चढ़ाने का काम चल रहा था।

बार एंड बेंच के मुताबिक, मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ कर रही है। अदालत ने कहा कि प्रशासन के तौर पर किरण बेदी के व्यापक अनुभव का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सरकार ने जताया विरोध

हालांकि, केंद्र, दिल्ली सरकार और एमसीडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने इसका विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार सत्य निकेतन हादसे को लेकर किरण बेदी को जनहित याचिका में पक्षकार बनाए जाने का विरोध करती है। शर्मा ने अदालत को बताया कि वह बेदी की ओर से दायर पक्षकार बनाए जाने की अर्जी पर आपत्ति दर्ज करते हुए जवाब दाखिल करेंगे।

सरकार का तर्क- वह अपनी राय पहले ही बना चुकीं

मामले में अदालत ने कहा कि किरण बेदी देश की एक सजग नागरिक हैं और उनके पास व्यापक अनुभव है। यह बड़े जनहित का मामला है। अदालत ने कहा कि उनके लंबे अनुभव का इस्तेमाल किया जा सकता है और सरकार को मामले को विरोधात्मक तरीके से नहीं लेना चाहिए। हालांकि, एएसजी चेतन शर्मा ने बेदी की अर्जी का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने इस मामले में पहले ही अपनी राय बना ली है। शर्मा ने कहा कि वह पक्षकार बनाए जाने की अर्जी पर सरकार की ओर से जवाब दाखिल करेंगे। अदालत ने सरकार को अपनी आपत्तियां दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है।

हादसे पर अदालत की टिप्पणी

दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि सत्य निकेतन में बहुमंजिला हॉस्टल की इमारत ढहने की घटना कोई आम दुर्घटना नहीं थी। इस घटना में सात लोगों की मौत हो गयी थी, जिनमें अधिकतर छात्र थे।

अदालत ने कहा कि जान गंवाने वाले छात्र अपना करियर बनाने की उम्मीद के साथ छोटे शहरों से देश की राजधानी आए थे, लेकिन कुछ लोगों के ''लापरवाह और आपराधिक आचरण'' के कारण उनके ये सपने ''चकनाचूर'' हो गए।

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