शादी के स्याह दस्तावेजों का टूटा संस्मारक
शिखा और सौरभ की अदालती तलाक की कहानी थी जिससे पूरी अदालत की चौखट पर हृदय परिवर्तन हो गया. तलाक के कागज फाड़ फेंकने के बाद शिखा ने अपने पति से गले लगकर ऐसे रोई कि अदालत में एकदम सन्नाटा छा गया. इस दिलकश से हृदय परिवर्तन की कहानी का नाजुक बंधन क्या था?

सौजन्य से:- AajTak
Sign In
Advertisement
X
छह साल में शादी, तलाक का मुकदमा और फिर हैप्पी एंडिंग... सारे रंग एक जोड़े ने देख और जी लिए. जिससे तलाक चाह रही थी अदालत में उसकी एक मासूम मुस्कुराती नजर ऐसे पड़ी कि रिश्तों को लगी नजर उतर गई. और पति से ऐसी कस कर लिपटी कि तमाम गिले शिकवे आंसुओं के सैलाब में बह गए.
कोर्ट में पति से तलाक का केस लड़ रही शिखा अपने पति सौरभ से गले लगकर ऐसे रोई कि आंसुओं से तलाक के स्याह दस्तावेज गल गए. फिर गले हुए कागजों का क्या ही काम था. शिखा ने वहीं तलाक के कागज फाड़ दिए. आइए सुनिए हृदय परिवर्तन की ये कहानी...
सौरभ का विवाह शिखा के साथ 2020 में हुआ था. फिर कुछ महीनों बाद ही पति के साथ किच-किच खट-पट और फिर पति पर दहेज प्रताड़ना का फर्जी मुकदमा.
मांग थी पति से तलाक हो और वो जेल की चक्की पीसे. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में पांच साल से मुकदमा चल रहा था. वकीलों के दांव पेंच, कानूनी प्रक्रिया की लंबी अंधेरी सुरंग में लड़ते चलते शिखा के पिता की जमा पूंजी चुक गई.
लेकिन बेटी की जिद और भविष्य के तनाव व आर्थिक तंगी के चलते शिखा के पिता को हार्ट अटैक आ गया. गांठ में पैसा था नहीं तो शिखा ने उनको सरकारी अस्पताल में भर्ती करवा दिया.
Advertisement
पिता की बीमारी ने बदल दी पूरी कहानी
शिखा के पति सौरभ को जब यह सब पता चला तो विवाद की परवाह किए बिना वह अपने ससुर को अच्छे अस्पताल यानी गुरुग्राम के मेदांता मेडिसिटी में ले गया. समय से बढ़िया इलाज मिला तो वो ठीक हो गए.
कोर्ट के बाहर का वो पल
शिखा भी लाइन पर आ गई लेकिन एक अटक थी. मिलन में मुकदमा आड़े आ रहा था. पिता घर आए. अगले ही दिन कोर्ट में सुनवाई थी दोनों कोर्ट पहुंचे वकील बहस कर रहे थे. तभी जज साहब ने सौरभ से पूछा कि तलाक देना चाहते हो?
सौरभ ने कुछ बोलने से पहले शिखा की ओर फीकी मुस्कान फेंकी. बस उसी पल शिखा ने तलाक के कागज फाड़ दिए और दौड़ती हुई सौरभ के पास आ गई. उसके बाद शिखा अपने पति के साथ कुछ इस तरह लिपटकर रोने लगी कि अदालत में एकदम सन्नाटा छा गया. पति के इस व्यवहार से शिखा को बहुत पछतावा हुआ.
---- समाप्त ----
TOPICS:
Latest News in Hindi »
Advertisement
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
उच्च न्यायालयों में बड़ा इजाफा: 30 नए जज नियुक्त, मद्रास उच्च न्यायालय को मिला सबसे बड़ा हिस्सा

वकील भी मध्यस्थ होने चाहिए, न्यायाधीश शर्मिला देशमुख का मुख्यबिन्दु

वक्फ मुकदमों में कोर्ट फीस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, नोटिस जारी

भारत और गोपनीयता: व्हाट्सएप के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पर दबाव और भारत की सीमाएं

सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी की नई अपील, आंखों का इलाज विदेश जाने की मांग

अदालत ने FDA को फटकार लगाई: अमेज़ॅन मामले में 'तलवार से मच्छर मारने' का आरोप

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश: अखिल भारतीय बार परीक्षा परिणाम के चार सप्ताह में नामांकन संख्या जारी हो

कानूनी ज्ञान में बढ़ाई: लाइवलॉ और क्यूशाला का साप्ताहिक क्विज़ शुरू हो गया
ताज़ा ख़बरें
- वक्फ मामला: कोर्ट फीस के बिना मुकदमे खारिज करने से चुनिंदा लोग क्यों फायदेमंद हैं?
- स्थायी लोक अदालत: अधिकारियों को जागरूक करने का अभियान
- सुप्रीम कोर्ट में JPSC मामला पहुंचा, दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
- कानूनी रूप से जिज्ञासु लोगों के लिए लाइवलॉ और क्यूशाला की चुनौती
- सुप्रीम कोर्ट ने डीपीडीपी अधिनियम और आरटीआई संशोधन पर केंद्र से जवाब मांगा
- पश्चिम बंगाल एसआईआर ट्रिब्यूनल के पूर्व हाई कोर्ट जज ने सुप्रीम कोर्ट में सुरक्षा की मांग
- राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण नियमों पर मांगा जवाब
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आप अंडे से डरने का क्या है; स्वतंत्रता सेनानियों ने गोलियां खाईं

