विपक्ष ने सरकार से पूछा कि पेपर लीक की जिम्मेदारी कौन लेगा, शिक्षा व्यवस्था में सुधार की माँग
कांग्रेस, आरजेडी, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने पेपर लीक की घटनाओं, छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार से जवाब माँगा। विपक्ष ने कहा कि केवल सख्त कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि पूरी व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
Paper Leak New Law: टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने सरकार से पूछा कि यदि नए कानून के बाद भी पेपर लीक होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने कहा कि केवल जुर्माना बढ़ाने और सजा कड़ी करने से समस्या खत्म नहीं होगी। जानें शशि थरूर, इमरान प्रतापगढ़ी समेत अन्य सांसदों ने क्या कहा।
नई दिल्ली: पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल को लेकर संसद में विपक्षी सांसदों ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस, आरजेडी, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने पेपर लीक की घटनाओं, छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार से जवाब मांगा। विपक्ष ने कहा कि केवल सख्त कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि पूरी व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
इमरान प्रतापगढ़ी ने क्या कहा
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुरुआत से ही कुछ प्रमुख मांगें रखी थीं, जिनमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों के साथ कथित बर्बरता रोकना और छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना शामिल था। सरकार को आखिरकार इन मुद्दों पर कदम उठाने पड़े हैं।
इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि पेपर लीक का मुद्दा सिर्फ कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की जवाबदेही से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि 2024 में भी सरकार इसी तरह का बिल लेकर आई थी, लेकिन उसके बाद भी परीक्षा व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं आए। विपक्ष संसद में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करेगा और सरकार से जवाब मांगेगा।
जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर सरकार पर निशाना
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने जौहर यूनिवर्सिटी के मामले को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस देश में विश्वविद्यालयों को गिराने के आदेश दिए जाते हैं, वहां यह सोचने की जरूरत है कि शिक्षा संस्थानों के साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय देश की विरासत का हिस्सा होते हैं और सरकार को राजनीतिक विरोध से ऊपर उठकर शिक्षा संस्थानों को बचाने की दिशा में काम करना चाहिए। शिक्षा के मंदिरों को नुकसान पहुंचाने के बजाय उन्हें मजबूत किया जाना चाहिए।
पुलिस कार्रवाई पर सवाल
कांग्रेस सांसद करमवीर सिंह बौद्ध ने छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवा छात्राओं के साथ बेरहमी से व्यवहार करना देश के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाना विपक्ष की जिम्मेदारी है और अगर छात्रों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना गलत माना जाता है, तब भी विपक्ष अपनी भूमिका निभाता रहेगा। उन्होंने संविधान के तहत सभी नागरिकों को सम्मान और अधिकार मिलने की बात कही।
शशि थरूर बोले- महत्वपूर्ण सवाल उठाए जाएंगे
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पब्लिक एग्जामिनेशन बिल पर कहा कि संसद में लंबी चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का यह दावा कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा से समस्या खत्म हो जाएगी, पर्याप्त नहीं है। थरूर ने कहा कि सवाल यह है कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार गड़बड़ी क्यों हो रही है और इसे रोकने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री का इस्तीफा कुछ परिस्थितियों में जरूरी हो सकता है, लेकिन इससे पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने पूरे सिस्टम की जांच और बड़े सुधारों की जरूरत बताई।
मनोज झा बोले- समस्या केवल कानूनों की कमी नहीं
आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि समस्या केवल कानूनों की कमी नहीं है, बल्कि व्यवस्था की नीयत और कार्यप्रणाली से जुड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में गलत काम सामने आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सरकार को परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
संजय यादव ने एके-47 से फायरिंग का उठाया मुद्दा
आरजेडी सांसद संजय यादव ने बिहार में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान एके-47 से फायरिंग की घटना को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक इतिहास में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर इस तरह की कार्रवाई बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि छात्रों के खिलाफ हथियारों के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने पुलिस कार्रवाई के दौरान तय नियमों और मानकों के पालन पर भी सवाल खड़े किए।
अफजल अंसारी बोले- पेपर लीक रोकने के लिए पहले भी कानून मौजूद
समाजवादी पार्टी के सांसद अफजल अंसारी ने कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए पहले भी कानून मौजूद थे लेकिन समस्या उनके प्रभावी अनुपालन की है। उन्होंने कहा कि कई पुराने मामलों में अभी तक निर्णय नहीं हो पाया है और ऐसे में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सजा बढ़ाने का प्रावधान किया है, जिसमें 10 साल तक की जेल और करोड़ों रुपये के जुर्माने जैसी बातें शामिल हैं लेकिन असली सवाल यह है कि कानून लागू कैसे होगा।
कीर्ति आजाद बोले- समस्या खत्म नहीं होगी
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने सरकार से पूछा कि यदि नए कानून के बाद भी पेपर लीक होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने कहा कि केवल जुर्माना बढ़ाने और सजा कड़ी करने से समस्या खत्म नहीं होगी। कीर्ति आजाद ने कहा कि सरकार ने पहले पेपर लीक के खिलाफ बेहद सख्त कानून लाने की बात कही थी, लेकिन अब जरूरत इस बात की है कि परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को दूर किया जाए।
लेखक के बारे मेंरुचिर शुक्लारुचिर शुक्ला, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट न्यूज एडिटर हैं। फरवरी 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े हैं। वह होमपेज टीम के सदस्य हैं। शिफ्ट देखने के साथ न्यूज स्टोरी लिखने और संपादन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। खबरों के अलग-अलग एंगल से डेवलप करने में माहिर है। करियर की शुरुआत 2011 में न्यूज एजेंसी से की, इस दौरान डेस्क के साथ-साथ रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया। कई अहम खबरों को ब्रेक किया। राजनीतिक, सामाजिक, क्राइम, पॉजिटिव न्यूज में विशेषज्ञता रखते हैं। न्यूज एजेंसी से शुरुआत के बाद टीवी फिर डिजिटल न्यूज टीम का हिस्सा बने। करीब 13 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत हैं।
विशेषज्ञता : रुचिर शुक्ला की पॉलिटिकल खबरों में खास रुचि है। ब्रेकिंग पर नजर रहती है। बड़ी खबरों से जुड़ी इनसाइड स्टोरी, एनालिसिस में भी महारत रखते हैं। क्राइम, पॉजिटिव, सक्सेस स्टोरी के साथ ग्लोबल पॉलिटिकल मुद्दों पर भी निगाहें रहती हैं।
पत्रकारिता का अनुभव : रुचिर शुक्ला ने 2011 में News Point न्यूज एजेंसी से करियर की शुरुआत की, जहां डेस्क के साथ रिपोर्टिंग में हाथ आजमाया। इस दौरान बीजेपी और कांग्रेस बीट को कवर किया। कई खबरें ब्रेक की। इस दौरान पंजाब पुलिस से जुड़ी एक डॉक्यूमेंट्री में भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की। 2012 में मैजिक टीवी न्यूज चैनल से जुड़े। 2013 में इंडिया न्यूज के बिहार-झारखंड चैनल से जुड़े। अप्रैल 2014 में अमर उजाला डिजिटल से जुड़े। इस दौरान होम टीम में कई अहम जिम्मेदारी संभाली। करीब ढाई साल तक अमर उजाला डिजिटल में रहने के बाद अगस्त 2016 में वनइंडिया हिंदी से जुड़े। यहां उन्होंने होम टीम और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान यूपी असेंबली इलेक्शन 2017 को लेकर अहम जिम्मेदारी मिली। वनइंडिया हिंदी में रहते हुए लोकसभा चुनाव 2019 कवर किया। जिसमें कई खास विश्लेषण और स्पेशल स्टोरी की। इसके बाद 2011 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी खास रोल निभाया। फरवरी 2020 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़ने के बाद कई अहम जिम्मेदारियों को संभाला। फिलहाल रुचिर होम पेज और शिफ्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रुचिर शुक्ला ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से हिंदी ऑनर्स में ग्रेजुएशन किया है।... और पढ़ें
कन्वर्सेशन शुरू करें
Indiaकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने दिया महत्वपूर्ण फैसला: एनसीएससी के पास आदेश देने की न्यायिक शक्ति नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने अशोक चक्र लगाने की मांग को ठुकराया, अदालत ने दिया ये जवाब

नई नीलामी नियमावली: विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए वियतनाम कानून में संशोधन

क्या डेटा सुरक्षा बोर्ड आपकी सुरक्षा के लिए भारत में पर्याप्त स्वतंत्र है?

भूमि कानून में संशोधन: किन मामलों में भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र नहीं दिए जाएंगे?

हाईकोर्ट के किन फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में नहीं चैलेंज कर सकते हैं

तंबाकू से होने वाले नुकसान की रोकथाम और नियंत्रण के लिए कानून में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समाप्त करने का प्रस्ताव

प्रदर्शनों पर पुलिस बल प्रयोग: भारतीय कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय
ताज़ा ख़बरें
- निवेश, बजट और सीमा शुल्क संबंधी कानूनों में संशोधन पर राय आमंत्रित
- संविधान का अनुच्छेद 142: एक असाधारण शक्ति की उपयोगिता बनाम छात्रों के भविष्य की सुरक्षा
- सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों को दिल्ली HC से वित्तीय राहत मिली क्या यह मामला है
- संशोधित खाद्य सुरक्षा कानून को पूरा करना: विकेंद्रीकरण, डिजिटल परिवर्तन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने को बढ़ावा
- कम्यून स्तर की सैन्य एजेंसियों के लिए कानूनी ढांचे को सुधारने का प्रयास
- कार्यकारी सर्कुलर कानून से मिले वेतन के अधिकार को सीमित नहीं कर सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
- वियतनाम में मुद्रा और बैंकिंग से संबंधित कानूनों में संशोधन हेतु जनप्रतिक्रिया आमंत्रित
- 69000 शिक्षक भर्ती मामला: सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से मांगे सुझाव

