बिहार विधानसभा के बिना सदन के सदस्य बने मंत्री होते हैं अवैध: सुप्रीम कोर्ट सुनवाई में
सुप्रीम कोर्ट आज बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश मामले में सुनवाई करेगा. वह बिना सदन का सदस्य बने मंत्री हैं.

सौजन्य से:- ETV Bharat
बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट आज बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश मामले में सुनवाई करेगा. वह बिना सदन का सदस्य बने मंत्री हैं. रिपोर्ट- अविनाश कुमार.
Published : August 4, 2026 at 9:30 AM IST
पटना: बिहार सीएम सम्राट चौधरी की सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के बिना किसी सदन के सदस्य बने मंत्री बने रहने को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. पिछली सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए रखने पर बिहार सरकार से जवाब मांगा था.
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कहा था कि यह पूरी तरह संविधान और कानून की व्याख्या का मामला है. अदालत ने बिहार सरकार से पूछा कि अनुच्छेद 164(4) के रहते कोई व्यक्ति बिना किसी सदन का सदस्य बने छह महीने से अधिक समय तक मंत्री कैसे बना रह सकता है?
बिहार सरकार कोर्ट में रखेगी अपना जवाब:आज बिहार सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के सामने जवाब रखा जाएगा. अब देखना है कि बिहार सरकार की तरफ से कोर्ट में क्या जवाब दिया जाता है.
पूरा मामला दीपक प्रकाश को दोबारा शपथ दिलाने के विवाद से शुरू हुआ था. दीपक प्रकाश को पहली बार 20 नवंबर 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बनाया गया था. छह महीने की अवधि पूरी होने से पहले बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ. इसके बाद सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने पर 7 मई 2026 को मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें फिर शपथ दिलाई गई.
दोबारा शपथ दिलाने से शुरू हुआ विवाद:यहीं से विवाद शुरू हुआ कि क्या एक ही विधानसभा कार्यकाल में बिना किसी सदन का सदस्य बने किसी व्यक्ति को दोबारा मंत्री बनाया जा सकता है. याचिकाकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि पहली बार मंत्री बनने के बाद छह महीने की संवैधानिक अवधि पूरी हो चुकी थी.
इसके बावजूद बिना विधायक या विधान पार्षद बने दीपक प्रकाश को फिर मंत्री बनाया गया, जो संविधान के अनुच्छेद 164(4) की भावना के विपरीत है. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के चर्चित एस.आर. चौधरी बनाम पंजाब राज्य मामले का हवाला दिया है. उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी.
एस.आर. चौधरी केस का दिया हवाला:सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी व्यक्ति को बार-बार छह महीने के प्रावधान का सहारा लेकर मंत्री बनाना संविधान की भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है. ऐसे में एनडीए ने बीजेपी एमएलसी देवेश कुमार से इस्तीफा ले लिया है और दीपक प्रकाश के लिए सदस्य बनने का रास्ता तैयार कर लिया है.
इसके बावजूद पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के बाद क्या फैसला सुनाता है, यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि पूरे देश के लिए एक नजीर बनेगा. इस पूरे मामले की कानूनी वैधता पर अब देश की सबसे बड़ी अदालत अंतिम निर्णय लेगी.
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