सड़कों पर पैदल चलने का मौलिक अधिकार, सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि देश की हर सड़क पर पैदल यात्रियों के लिए स्पष्ट और अतिक्रमण-मुक्त रास्ता सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने कहा है कि संबंधित अधिकारियों को पैदल चलने वालों के लिए अलग स्थान सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य या भारी निवेश की आवश्यकता नहीं है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
'पैदल चलना नागरिकों का मौलिक अधिकार', सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को सख्त निर्देश, सड़कों पर अतिक्रमण हटे
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि देश की हर सड़क पर पैदल यात्रियों के लिए स्पष्ट और अतिक्रमण-मुक्त रास्ता सुनिश्चित किया जाए।
संबंधित अधिकारियों को दें निर्देश
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज से कहा कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश दें कि पैदल चलने वालों के लिए निर्धारित स्थान पर किसी तरह का अतिक्रमण न हो और उसे मोटर वाहनों की लेन से स्पष्ट रूप से अलग किया जाए।जहां सड़क, वहां पैदल यात्रियों के लिए भी जगह'
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि पैदल चलने वालों के लिए अलग स्थान सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य या भारी निवेश की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि जरूरत पड़े तो रस्सी, बैरिकेड या किसी अन्य सरल माध्यम से भी पैदल मार्ग को अलग किया जा सकता है। पीठ ने कहा, "जहां भी सड़क हो, वहां पैदल चलने वालों के लिए जगह होनी चाहिए।ज्यादा निवेश की नहीं जरूरत बस करें ये सुनिश्चित
सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि बड़े निर्माण या भारी निवेश की जरूरत नहीं है। केवल यह सुनिश्चित करें कि पैदल चलने वालों के लिए निर्धारित स्थान स्पष्ट रूप से चिन्हित हो, उस पर अतिक्रमण न हो और वह मोटर वाहनों की लेन से अलग हो। अदालत ने कहा कि पैदल यात्रियों में यह विश्वास होना चाहिए कि जो स्थान उनके लिए निर्धारित किया गया है, वहां वे बिना किसी भय के सुरक्षित रूप से चल सकते हैं और उन्हें तेज रफ्तार वाहनों से खतरा नहीं होगा।केंद्र सरकार को दो सप्ताह का समय
सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज को संबंधित विभागों और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कराने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अदालत ने कहा कि इस अवधि में यह सुनिश्चित किया जाए कि पैदल यात्रियों के लिए निर्धारित स्थान को सुरक्षित रखा जाए और उस पर किसी प्रकार का अतिक्रमण न होने पाए। मामले की अगली सुनवाई अब दो सप्ताह बाद होगी, जब केंद्र सरकार अदालत को उठाए गए कदमों की जानकारी देगी।19 जून के ऐतिहासिक फैसले का हवाला
सुनवाई के दौरान अदालत ने अपने 19 जून के ऐतिहासिक फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें उसने स्पष्ट किया था कि निर्धारित फुटपाथ पर पैदल चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पैदल चलने वालों का अधिकार केवल सुविधा का विषय नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त स्वतंत्रता और गरिमा से जुड़ा अधिकार है। अदालत ने माना था कि निर्धारित फुटपाथ पर पैदल यात्रियों का अधिकार मोटर वाहनों की तुलना में प्राथमिकता रखेगा।अनुच्छेद 19 और 21 से जुड़ा है पैदल चलने का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व फैसले में कहा था कि पैदल चलने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) के तहत प्रदत्त देश में स्वतंत्र रूप से आवागमन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। इसके साथ ही यह अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से भी जुड़ा हुआ है। अदालत ने माना था कि यदि नागरिकों को सुरक्षित और निर्बाध तरीके से पैदल चलने की सुविधा नहीं मिलती, तो उनके मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं। इसलिए सरकारों और स्थानीय निकायों का दायित्व है कि वे फुटपाथों और पैदल मार्गों को अतिक्रमण से मुक्त रखें तथा उन्हें इस प्रकार विकसित करें कि लोग बिना किसी भय के उनका उपयोग कर सकें।सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश
ताजा आदेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि सड़कों की योजना केवल मोटर वाहनों को ध्यान में रखकर नहीं बनाई जा सकती। शहरों और कस्बों में पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को भी समान प्राथमिकता देना सरकारों की संवैधानिक जिम्मेदारी है। अदालत का यह निर्देश देशभर में फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण, अवैध पार्किंग और पैदल यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा हैकन्वर्सेशन शुरू करें
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