सुप्रीम कोर्ट में ECI विवाद, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दो याचिकाओं की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर दो रिट याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें SIR के लगभग 14 एकतरफ़ा फैसलों को अन्य आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद लिये जाने पर सवाल उठाए गये हैं। याचिकाओं में उनके निलंबन, उन फैसलों को रद्द करना, ECINet‑ERONet का फोरेंसिक ऑडिट और स्वतंत्र जांच आयोग के गठन की मांग की गई है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
ECI विवाद में सुप्रीम कोर्ट सोमवार को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें SIR के 14 कथित एकतरफा फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाओं में ज्ञानेश कुमार के निलंबन, फैसलों को रद्द करने और ECINet-ERONet के फोरेंसिक ऑडिट समेत स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
नई दिल्ली: चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को अहम सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर दो रिट याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े करीब 14 फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की कथित असहमति के बावजूद लिए गए। मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ करेगी।
14 फैसलों को लेकर उठे सवाल
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, ये याचिकाएं उन खबरों के आधार पर दाखिल की गई हैं, जिनमें कहा गया है कि अन्य दो चुनाव आयुक्तों-सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों के बावजूद ECI के नाम पर करीब 14 फैसले लिए गए। याचिकाओं के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच SIR के अलग-अलग चरणों को लेकर कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
याचिका में कहा- ECI के फैसले एकतरफा नहीं हो सकते
रमेश कुमार सिंह की ओर से दाखिल एक याचिका में मांग की गई है कि यह स्पष्ट किया जाए कि भारत निर्वाचन आयोग, जो एक बहु-सदस्यीय निकाय है, उसके फैसले एकतरफा तरीके से नहीं लिए जा सकते। याचिकाकर्ता ने आयोग के मूल रिकॉर्ड की जांच की भी मांग की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि विवादित कदम संवैधानिक और कानूनी ढांचे के मुताबिक उठाए गए थे या नहीं।
ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग
याचिका में अंतरिम राहत के तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से निलंबित करने की मांग भी की गई है। वहीं, दूसरी याचिका वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की है। इसमें कथित तौर पर एकतरफा लिए गए 14 फैसलों को रद्द करने की मांग की गई है।
स्वतंत्र जांच आयोग या SIT की मांग
दूसरी याचिका में पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग या विशेष जांच दल यानी SIT गठित करने की मांग की है। इस जांच में साइबर सिक्योरिटी और IT विशेषज्ञों को भी शामिल करने की मांग की गई है।
ECINet और ERONet के फोरेंसिक ऑडिट की मांग
याचिका में ECINet और ERONet डेटाबेस के फोरेंसिक ऑडिट की मांग की गई है। साथ ही SIR प्रक्रिया के दौरान लिए गए फैसलों और उनकी परिस्थितियों की भी जांच की मांग की गई है। याचिका के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 13 करोड़ नाम हटाए गए। याचिकाकर्ता ने इस पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
याचिकाकर्ता ने सक्षम अधिकारी को निर्देश देने की मांग की है कि ज्ञानेश कुमार, सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना और सरकारी ड्यूटी में कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले अन्य अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की जाए। याचिका में रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 की धारा 32 के तहत शिकायत और कार्रवाई की मांग की गई है।
धारा 32 के तहत किस तरह की लापरवाही का मामला?
याचिका में धारा 32 का हवाला दिया गया है। इस प्रावधान में वोटर लिस्ट तैयार करने, उसमें बदलाव या सुधार से जुड़ी सरकारी ड्यूटी में खास तरह की लापरवाही के लिए सजा का प्रावधान है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिन कामों को लेकर शिकायत की गई है, उनमें वोटर लिस्ट से जुड़े कई कदम शामिल हैं।
‘फॉर्म 6’ में बदलाव से लेकर डेटाबेस तक पर सवाल
याचिका में ‘फॉर्म 6’ में कथित तौर पर बिना अनुमति बदलाव, वोटर लिस्ट डेटाबेस के सेंट्रलाइजेशन और ECINet सिस्टम के जरिए योग्य मतदाताओं को दोबारा सूची में शामिल नहीं किए जाने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में ECI के नाम पर कथित तौर पर वोटरों को शामिल किए जाने को चुनौती देते हुए 16.10 लाख अपीलें दाखिल किए जाने का भी याचिका में जिक्र है। अब इन आरोपों, 14 कथित एकतरफा फैसलों और जांच की मांगों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अहम होगी।
लेखक के बारे मेंअशोक उपाध्यायअशोक उपाध्याय, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क पर काम करने का 12 साल का अनुभव। साल 2014 में नवभारत टाइम्स हिंदी अखबार से पत्रकारिता के सफर की शुरुआत की थी। पॉलिटिक्स और क्राइम बीट पर रिपोर्टिंग का काफी अनुभव है। अमर उजाला देहरादून में भी सेंट्रल डेस्क पर काम किया है। साथ ही कई चुनावों में ग्राउंड रिपोर्टिंग की है। पिछले 6 साल से NBT डिजिटल में न्यूज डेस्क पर काम कर रहे हैं। गूगल ट्रेंड्स को पकड़ने की अच्छी समझ है।
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पत्रकारिता अनुभव: प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 12 साल से कार्यरत हैं।
JIMMC नोएडा से साल 2013 में पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले साल 2010 में एमएमएच कॉलेज गाजियाबाद (सीसीएस यूनिवर्सिटी मेरठ) से राजनीतिक शास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की। लोक प्रशासन विषय पर खास पकड़ है। पत्रकारिता से पहले यूपीएससी और उत्तराखंड और यूपी पीसीएस एग्जाम की तैयारी के दौरान समाजशास्त्र, संविधान समेत कई विषयों का अध्ययन किया। संवेदनशील मुद्दों पर लिखने की खास कला है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर कई मार्मिक लेख लिखे हैं। ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए लोगों की समस्याओं के समाधान का प्रयास किया है, कई बार सफलता भी मिली है। पत्रकारिता में आगे और बेहतर सीखने और समझने का क्रम जारी है।... और पढ़ें
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