पंजाब में DA‑DR दांव‑पेंच: हाई कोर्ट ने दिया आदेश, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
पंजाब के लगभग 3.5 लाख स्थायी कर्मचारी और 4 लाख पेंशनधारी तीन साल से महंगाई भत्ते की प्रतीक्षा में हैं, जहाँ हाई कोर्ट ने सरकार को 30 जून 2026 तक बकाया DA/DR देने और सभी कर्मचारियों को IAS‑IPS के बराबर दर देने का आदेश दिया था। पंजाब सरकार ने इस आदेश को डिवीजन बेंच में खारिज कर दिया और अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रही है, जबकि भुगतान की अंतिम तिथि बीत चुकी है और हड़ताल की आशंका बढ़ी है।

सौजन्य से:- jagran.com
कर्मचारी पहुंचे हाई कोर्ट, सरकार गई सुप्रीम कोर्ट... आखिर क्या है पंजाब का DA-DR विवाद? इन 5 प्वाइंट्स में समझें
पंजाब के लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स पिछले तीन साल से महंगाई भत्ते का इंतजार कर रहे हैं, जिससे सरकार पर 25 हजार करोड़ का बोझ है।
HighLights
- लाखों कर्मचारी तीन साल से महंगाई भत्ते का इंतजार कर रहे
- हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था
- पंजाब सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में फैसले को चुनौती दे रही
रमनजीत सिंह मणकू, चंडीगढ़। पंजाब के करीब 3.5 लाख स्थायी कर्मचारी और करीबन 4 लाख पेंशनर्स पिछले तीन वर्ष से महंगाई भत्ते के इंतजार में हैं।
लंबित डीए और डीआर के भुगतान का मामला सड़क से हाई कोर्ट तक पहुंचने के बाद अब यह कर्मचारियों और सरकार के बीच सबसे बड़ा टकराव का कारण बन गया है।
इससे सरकार के खजाने पर 25 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है। कर्मचारी इसे अपना हक मान रहे हैं लेकिन सरकार का तर्क है कि कर्मचारियों को पहले से ही ज्यादा वेतन मिल रहा है।
1. विवाद क्या है?
केंद्रीय कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है, जबकि पंजाब राज्य कर्मचारियों को 42 प्रतिशत मिल रहा है। मुलाजिम संगठनों का कहना है कि इससे भी बड़ी विसंगति ये है कि पंजाब सरकार में ही तैनात आइएएस, आइपीएस, आइएफएस व ज्यूडिशियल अधिकारियों को 58 प्रतिशत डीए मिल रहा है और बाकी सभी कर्मचारियों को 42 प्रतिशत।
इसे दोहरा मापदंड बताते हुए कर्मचारी अदालत में गए। कर्मचारी यूनियनों के मुताबिक आप सरकार मार्च 2022 में आई, लेकिन उसने तब से सिर्फ एक ही डीए किस्त जारी की है।
जुलाई-दिसंबर 2022 की 4 प्रतिशत किस्त, जो दिसंबर 2023 में एक महीने से ज्यादा चली हड़ताल के बाद दी गई। जनवरी 2023 के बाद से सरकार ने कोई किस्त जारी नहीं की, इसलिए 1 जनवरी 2026 तक बकाया 18 प्रतिशत हो गया है।
2. 8 अप्रैल 2026
हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता निर्मल सिंह धनोआ व अन्य की याचिका पर पंजाब सरकार को आदेश दिया कि सभी बकाया डीए/डीआर को 30 जून 2026 तक जारी किया जाए और कर्मचारियों को आइएएस-आइपीएस के बराबर डीए दिया जाए। इससे करीब 7.5 लाख कर्मचारियों को फायदा होना था।
पंजाब सरकार और पीएसपीसीएल ने सिंगल बेंच के आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी, वित्तीय हालत खराब होने का हवाला दिया तो कोर्ट ने खारिज कर दिया।
3. 3 अगस्त 2026
चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने अपील खारिज कर दी। आदेश दिया कि 15 दिन के अंदर सारा बकाया चुकाओ। मुख्य सचिव को 31 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया था। यदि तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।
4. डेडलाइन के बाद सरकार का स्टैंड
डीए भुगतान की डेडलाइन 17 अगस्त को खत्म हो गई, लेकिन सरकार ने भुगतान नहीं किया। उल्टा 18 अगस्त को वित्त विभाग ने सभी विभागों को पत्र भेजकर कहा कि धनोआ केस के आधार पर तय हुए मामलों को वित्त विभाग की मंजूरी के बिना लागू न किया जाए।
इसी पत्र को आधार बनाकर कर्मचारियों ने फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अवमानना की कार्रवाई करने का आग्रह किया। डेडलाइन खत्म होते ही 17 अगस्त को कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दायर कर दी। 21 अगस्त को सुनवाई में सरकार ने समय मांगा, कोर्ट ने अगली तारीख 27 सितंबर 2026 तय की है।
5. कर्मचारी फिर कर सकते हैं हड़ताल
कर्मचारियों का सड़क पर आंदोलन तेज है। कर्मचारी संगठनों ने 27 अगस्त को महाहड़ताल की थी। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा है कि हड़ताल और बातचीत इकट्ठे नहीं हो सकती।
सरकार ने नोटिस जारी किया तो कर्मचारी संगठनों ने लुधियाना में बैठक करके अगली रणनीति के तहत अब सात सितंबर तक समय दिया है। कहा है कि शो-कॉज नोटिस वापस न हुए तो 8 सितंबर को मास कैजुअल लीव लेकर हड़ताल की जाएगी और मंत्रियों के घरों के बाहर प्रदर्शन किए जाएंगे।
अब आगे क्या
पंजाब सरकार अब सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी है। अब कर्मचारी संगठनों ने पहले से ही दायर की गई केविएट की वजह से दोनों पक्षों को सुनवाई का मौका मिलेगा और उसके बाद तय होगा सरकार की एसएलपी पर सुप्रीम कोर्ट किस तरह आगे बढ़ती है।
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