सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चक्र पर याचिका का निपटारा किया, कहा-आप दूसरी समस्याओं पर ध्यान दीजिए
सुप्रीम कोर्ट मुख्य गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चक्र स्थापित करने संबंधित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, "क्या सुप्रीम कोर्ट परिसर में क्या दिखाया जाए, यह कोर्ट का प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है। आप दुनिया में इतनी समस्याएं हैं उनका ध्यान रखिए।"

सौजन्य से:- Navbharat Times
भारत के एक राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चक्र से जुड़ा एक मामला सुप्रीम कोर्ट में याचिका के रूप में आया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता बाबा खतरनाक को पाठ पढ़ा दिया और कहा-ये मामला हम खुद देख लेंगे, आप दूसरी समस्याओं पर ध्यान दीजिए।
नई दिल्ली। सु्प्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय की इमारत पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक चक्र स्थापित करने से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे मामलों का निर्णय न्यायालय खुद करेगा।
सुप्रीम कोर्ट के गेट पर क्या लगाना है, हम देख लेंगे: CJI
यह याचिका बदरवाद वेणुगोपाल ने दायर की थी, जिन्हें बाबा खतरनाक के नाम से भी जाना जाता है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के गेट पर क्या लगाना है हम देख लेंगे...। आप दुनिया में इतनी समस्याएं हैं उनका ध्यान रखिए।'
सुप्रीम कोर्ट के गेट पर क्या लगाना है हम देख लेंगे...। आप दुनिया में इतनी समस्याएं हैं उनका ध्यान रखिए।
CJI सूर्यकांत
अनुच्छेद 32 के तहत दायर की थी याचिका
यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के मुख्य गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने से जुड़ी थी। इसे याचिकाकर्ता ने 'अदालतों की संवैधानिक पहचान' बताया था। कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, वेणुगोपाल ने पहले संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत एक रिट याचिका दायर करके इस मामले पर निर्देश देने की मांग की थी।
मुख्य गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने के बारे में मांगी थी जानकारी
23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि इस मामले की मुख्य रूप से प्रशासनिक स्तर पर जांच की जरूरत है और कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल को निर्देश दिया कि वे सक्षम अधिकारी के सामने उचित नोट पेश करें। इसके बाद, याचिकाकर्ता ने एक अर्जी दायर करके सुप्रीम कोर्ट के मुख्य गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने के संबंध में 23 मार्च को कोर्ट द्वारा जारी प्रशासनिक निर्देशों की स्थिति और उनके प्रभावी कार्यान्वयन के बारे में जानकारी मांगी।
रजिस्ट्रार ने दाखिल की थी एक अर्जी
सुप्रीम कोर्ट रूल्स, 2013 के तहत रजिस्ट्रार ने 3 जुलाई को यह अर्ज़ी दाखिल की थी। इसके बाद वेणुगोपाल ने रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ़ अपील दायर की, जिस पर मंगलवार को बेंच के सामने सुनवाई हुई। हालांकि, बेंच ने इसमें दखल देने से इनकार करते हुए अर्जी खारिज कर दी और कहा कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में क्या दिखाया जाए, यह मामला कोर्ट के अपने प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में आता है।
लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।
दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।
दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।
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पत्रकारिता का अनुभव
दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।
दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।... और पढ़ें
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