होमसंविधानसीजेआई सूर्यकांत: कानून तक समान पहुंच देना समानता की शुरुआत है
संविधान

सीजेआई सूर्यकांत: कानून तक समान पहुंच देना समानता की शुरुआत है

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि समानता की दिशा में पहला कदम कानून तक सभी की समान पहुंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह कानून के समक्ष समानता को वास्तविक रूप देने के लिए आवश्यक है।

25 जून 2026 को 12:24 pm बजे
सीजेआई सूर्यकांत: कानून तक समान पहुंच देना समानता की शुरुआत है

सौजन्य से:- Amar Ujala

CJI: ‘समानता की शुरुआत कानून तक समान पहुंच से होती है’, अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंच पर बोले सीजेआई सूर्यकांत

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि समानता की शुरुआत कानून तक सभी की समान पहुंच से होती है। उन्होंने जोर दिया कि न्याय केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि हर व्यक्ति को वास्तविक अधिकार मिले।

खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें

या

वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें

अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो

विस्तार

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा है कि समानता की दिशा में पहला कदम कानून तक समान पहुंच देना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए।

'कानून समानता वास्तव में क्या आवश्यक है?'

बुधवार को रूस में आयोजित 14वें सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय कानूनी मंच में बोलते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कानून तक समान पहुंच का फल खोखली वैधानिक घोषणाओं के बजाय वास्तविक अधिकारों के प्रावधान के रूप में मिलना चाहिए। हमें खुद से यह सवाल पूछना होगा कि कानून के समक्ष समानता को वास्तविक रूप देने के लिए वास्तव में क्या आवश्यक है? मेरा जवाब, जो मुझे दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे जटिल न्यायिक प्रणालियों की अध्यक्षता करने के अपने अनुभव से मिलता है। यह है कि समानता की दिशा में पहला कदम कानून तक समान पहुंच प्रदान करना है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'इस तरह की पहुंच महज एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं हो सकती है। खोखली वैधानिक घोषणाओं के बजाय वास्तविक अधिकारों के प्रावधान में परिणत होनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि समानता का जन्मस्थान जरूरी नहीं कि 1215 का मैग्ना कार्टा ही हो। उन्होंने कहा, 'बल्कि, मेरा व्यक्तिगत मानना है कि इसकी जड़ें कौटिल्य के अर्थशास्त्र में निहित हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप से संबंधित है, जिसने चौथी शताब्दी में समानता के सिद्धांत को प्रतिपादित किया था।ट

'असली चुनौती इन गारंटियों को केवल सुनाना नहीं'...

मुख्य न्यायाधीश  ने कहा कि भारतीय संविधान ने अपनी स्थापना के समय एक नए सवेरे का वादा किया और लोगों को मौलिक अधिकारों की एक श्रृंखला प्रदान की, जिसमें कानून के समक्ष समानता, गरिमापूर्ण जीवन और समान न्याय शामिल हैं। उन्होंने कहा, 'असली चुनौती इन गारंटियों को केवल सुनाना नहीं थी, बल्कि आर्थिक और सामाजिक कमियों, भाषा की बाधाओं और सांस्कृतिक विविधता की परवाह किए बिना, भौगोलिक दूरियों के पार इन्हें पहुंचाना था।'

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि समानता के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा कानूनी या वैधानिक समर्थन की कमी नहीं है, बल्कि यह भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक असमानताओं के कारण प्रकट होती है। उन्होंने कहा, 'भारतीय संवैधानिक न्यायालयों ने संवैधानिक गारंटियों की व्यापक और विस्तृत व्याख्या की है ताकि ऐसी सभी बाधाओं को दूर किया जा सके। यह दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि कानून और न्याय तक पहुंच केवल एक तकनीकी सुविधा नहीं बल्कि शासन का एक गैर-भेदभावपूर्ण मूलभूत सिद्धांत है।'

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि समान न्याय और समान कानून केवल औपचारिक वाक्यांश नहीं हैं, बल्कि ये वे शर्तें हैं जिनके तहत कोई कानूनी व्यवस्था खुद को कानून कह सकती है। अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे के संबंध में, मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वैश्विक पूर्व और दक्षिण के कई राष्ट्र अभी भी अपनी संस्थाओं का निर्माण कर रहे हैं, उपनिवेशवाद के परिणामों को संबोधित कर रहे हैं और गरीबी से निपट रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'इन देशों को अक्सर ऐसी जांच और दबाव का सामना करना पड़ता है जो धनी और अधिक प्रभावशाली राज्यों पर आनुपातिक रूप से लागू नहीं होता है, जिनके स्वयं के अनुपालन रिकॉर्ड भी जरूरी नहीं कि त्रुटिहीन हों।'

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: किसानों को मिलेगा 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़, भू स्वामी पहले से मिलने वाला पैसा शामिल होगा
संविधान

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: किसानों को मिलेगा 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़, भू स्वामी पहले से मिलने वाला पैसा शामिल होगा

รाष्ट्रीय सभा में वास्तुकला कानून संशोधन पर चर्चा
संविधान

รाष्ट्रीय सभा में वास्तुकला कानून संशोधन पर चर्चा

कानून के प्रसार में डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती जिम्मेदारी
संविधान

कानून के प्रसार में डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती जिम्मेदारी

विधि प्रसार एवं शिक्षा संबंधी कानून (संशोधित) पर चर्चा
संविधान

विधि प्रसार एवं शिक्षा संबंधी कानून (संशोधित) पर चर्चा

सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के मुआवजे में किया बदलाव, 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ का निर्धारण
संविधान

सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के मुआवजे में किया बदलाव, 6.5 लाख रुपये प्रति एकड़ का निर्धारण

अमेरिकी धर्म-नीति और भारत के संप्रभु वित्त कानून: एक टकराव
संविधान

अमेरिकी धर्म-नीति और भारत के संप्रभु वित्त कानून: एक टकराव

उच्च न्यायालयों को एनसीएलटी के आदेशों के खिलाफ रिट पर विचार नहीं करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
संविधान

उच्च न्यायालयों को एनसीएलटी के आदेशों के खिलाफ रिट पर विचार नहीं करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दो हाईकोर्ट जजों के तबादले की सिफारिश की
संविधान

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दो हाईकोर्ट जजों के तबादले की सिफारिश की

ताज़ा ख़बरें