चंडीगढ़ कोर्ट ने सेक्स रैकेट के तीन आरोपियों को बरी, अभियोजन के सबूत अपर्याप्त
दस साल पुरानी सेक्स रैकेट के मुकदमे में चंडीगढ़ की जिला अदालत ने तीन आरोपी—सुलखान सिंह, गुरदर्शन सिंह और योगिता तमांग—को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष प्रमुख गवाह के जिरह को पूरा नहीं कर पाया, डीएसपी दीपक यादव की गवाही नहीं हो पाई और स्वतंत्र गवाहों का अभाव रहा, जिससे साक्ष्य अपर्याप्त रहे।

सौजन्य से:- Jagran
क्रॉस एग्जामिनेशन में पेश नहीं हुए डीएसपी, चंडीगढ़ कोर्ट से सेक्स रैकेट के आरोपित बरी
चंडीगढ़ की जिला अदालत ने सेक्स रैकेट मामले में तीन आरोपितों को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन ...और पढ़ें
HighLights
- चंडीगढ़ कोर्ट ने नौ साल पुराने सेक्स रैकेट मामले में बरी किया।
- अभियोजन सबूत और मुख्य गवाह की जिरह पूरी नहीं कर पाया।
- अदालत ने स्वतंत्र गवाहों की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। आईएसबीटी-43 के पास सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में दर्ज करीब नौ साल पुराने मामले में जिला अदालत ने तीन आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सचिन यादव की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए जरूरी साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
अदालत ने विशेष रूप से इस बात को गंभीर माना कि मामले के शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी तत्कालीन डीएसपी दीपक यादव की गवाही पर जिरह पूरी ही नहीं हो सकी। उनकी क्रॉस एग्जामिनेशन 30 सितंबर 2023 को स्थगित हुई थी, लेकिन इसके बाद अभियोजन उन्हें दोबारा अदालत में पेश नहीं कर सका।
अदालत ने कहा कि किसी मामले के मुख्य गवाह की जिरह नहीं होने पर उसकी गवाही अधूरी, अपरीक्षित और एकतरफा रहती है। ऐसे बयान को आरोपितों के खिलाफ साक्ष्य के तौर पर नहीं पढ़ा जा सकता।
तीनों युवतियों को ही बनाया आरोपित, पीड़ित कौन था?
अदालत ने फैसले में अभियोजन की कहानी पर एक अहम सवाल उठाया। पुलिस के अनुसार छापेमारी के दौरान तीन युवतियां कार में मिली थीं और आरोप था कि उन्हें देह व्यापार के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
लेकिन तीनों युवतियों को ही इस मामले में आरोपित बनाया गया था। अदालत ने पूछा कि यदि ये तीनों आरोपित थीं तो पीड़ित कौन था। अभियोजन यह भी साबित नहीं कर सका कि आरोपित किस व्यक्ति की देह व्यापार से हुई कमाई पर निर्भर थे या किस युवती को देह व्यापार के लिए लाया गया था।
स्वतंत्र गवाह भी नहीं जोड़ा
अदालत ने यह भी कहा कि छापेमारी सार्वजनिक स्थान पर हुई थी, लेकिन पुलिस ने कोई स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किया। इससे अभियोजन की कहानी पर संदेह और गहरा हुआ।
डिकॉय ग्राहक बनाए गए प्रिंस की गवाही पर भी अदालत ने सवाल उठाए, क्योंकि वह पहले भी कई मामलों में गवाह रह चुका था और सोशल वेलफेयर कमेटी से जुड़े होने का कोई पहचान पत्र या दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
मामले में सुलखान सिंह, गुरदर्शन सिंह और योगिता तमांग के खिलाफ अनैतिक देह व्यापार (रोकथाम) अधिनियम की धारा 4, 5, 7 और 8 के तहत मुकदमा चला था। अदालत ने अभियोजन के साक्ष्य को अपर्याप्त मानते हुए तीनों को बरी कर दिया। दो अन्य आरोपित राजनी देवी और हरप्रीत कौर पहले ही भगोड़ा घोषित हो चुकी हैं।
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुपौल में 12 सितंबर को लोक अदालत, 16,600 ट्रैफ़िक‑परिवहन मामलों का त्वरित निपटारा, 90‑दिन पुराने चालानों पर 50% तक राहत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शरिया कोर्ट के आदेश को कानूनी मान्यता नहीं दी

हरी झंडी दिखाकर शुरू, 12 सितंबर को हमीरपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

लखनऊ की पुलिस‑कानूनी सेवा मिलकर लोक अदालत का प्रचार करेंगे गांव-गांव

सर्वर त्रुटि 500: अस्थायी व्यवधान

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल एवं कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगाई: बिना आरटीई, एनसीटीई, यूजीसी योग्यता के नहीं होंगे

सर्वर त्रुटि 500 – पुनः प्रयास करें

500 सर्वर त्रुटि: अस्थायी समस्या
ताज़ा ख़बरें
- सर्वर त्रुटि 500: बाद में पुनः प्रयास करें
- सर्वर त्रुटि 500 – कृपया बाद में पुनः प्रयास करें
- सर्वर पर 500 त्रुटि: पृष्ठ लोड नहीं हो पाया
- 500 सर्वर त्रुटि – पुनः प्रयास करें
- सर्वर त्रुटि 500: पुनः प्रयास करें
- सर्वर त्रुटि 500 – अस्थायी समस्या, कृपया पुनः प्रयास करें
- सर्वर त्रुटि 500 – अस्थायी समस्या
- राष्ट्रीय लोक अदालत: महराजगंज में मामलों के तेज निपटारे की पहल

