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बक्सर में लोक अदालत पर जागरूकता अभियान आरम्भ

12 सितंबर को बक्सर व्यवहार न्यायालय परिसर में तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन के लिए जागरूकता रथ का प्रक्षेपण किया गया। यह रथ जिला के प्रखंडों और ग्रामीण इलाकों तक पहुँचकर लोक अदालत के लाभ एवं सुलह योग्य मामलों के बारे में जानकारी देगा। लोक अदालत में बैंक ऋण वसूली, सिविल वाद, बिजली बिल विवाद, श्रम व मोटर दुर्घटना दावे तथा 90 दिनों से अधिक पुराने यातायात ई‑चालान जैसे मामलों का निपटारा होता है, और यह किसी कोर्ट फीस के बिना, दीवानी अदालत के निर्णय के समान मान्य है।

8 सितंबर 2026 को 12:32 am बजे
बक्सर में लोक अदालत पर जागरूकता अभियान आरम्भ

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar

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लोक अदालत को ले जागरुकता रथ रवाना

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आगामी 12 सितंबर को बक्सर व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित होने वाली वर्ष की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर जिले में जागरुकता अभियान शुरू कर दिया गया है।

व्यवहार न्यायालय परिसर से जागरुकता रथ को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष काजल झाम्ब ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकार और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के निर्देश पर आयोजित होने वाली इस राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य अधिक से अधिक सुलहनीय मामलों का आपसी सहमति और समझौते के आधार पर त्वरित निष्पादन करना है। जागरूकता रथ जिले के विभिन्न प्रखंडों, पंचायतों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचेगा। इस दौरान लाउडस्पीकर एवं पंपलेट के माध्यम से लोगों को लोक अदालत के फायदे और निपटारे योग्य मामलों की जानकारी दी जाएगी।

लोक अदालत में बैंक ऋण वसूली, सिविल वाद, बिजली बिल विवाद, श्रम विवाद, मोटर दुर्घटना दावा , वैवाहिक विवाद तथा 90 दिनों से अधिक पुराने यातायात ई-चालान जैसे सुलहनीय मामलों का निपटारा किया जा सकता है। हालांकि, वैवाहिक मामलों में आपराधिक प्रकृति के मामलों को शामिल नहीं किया जाएगा।

लोक अदालत में मामलों के निपटारे के लिए किसी प्रकार की कोर्ट फीस नहीं लगती है। यदि किसी मामले में पहले से कोर्ट फीस जमा की गई है, तो नियमानुसार उसे वापस किया जा सकता है। लोक अदालत में पारित आदेश को दीवानी अदालत की डिक्री के समान मान्यता प्राप्त होती है और इसके खिलाफ अपील का प्रावधान नहीं होता।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने जिले के नागरिकों एवं पक्षकारों से अपील की है कि वे 12 सितंबर को व्यवहार न्यायालय परिसर पहुंचकर अपने सुलहनीय लंबित मामलों का आपसी सहमति से निपटारा कराएं और समय व धन दोनों की बचत करें।

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