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घुमारवीं कोर्ट ने लिखित उत्तर में देरी को मान्य कर दी अतिरिक्त समय की राहत

घुमारवीं के सिविल जज कोर्ट नंबर‑3 ने प्रतिवादी द्वारा लिखित जवाब दाखिल करने में हुई देरी को मान्य कर अतिरिक्त समय देने का आवेदन स्वीकार किया। कोर्ट ने यह रेखांकित किया कि न्याय केवल तकनीकी पहलुओं पर नहीं, बल्कि मामले के गुण‑दोष पर आधारित होना चाहिए। प्रतिवादी ने बताया कि देरी अनजाने में और सद्भावना से हुई, जबकि वादी ने इस आवेदन को खारिज करने की मांग की।

4 सितंबर 2026 को 07:31 pm बजे
घुमारवीं कोर्ट ने लिखित उत्तर में देरी को मान्य कर दी अतिरिक्त समय की राहत

सौजन्य से:- Amar Ujala

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Bilaspur News: लिखित जवाब में देरी पर घुमारवीं अदालत ने दी राहत

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कहा- मामला तकनीकी आधार पर नहीं, गुण-दोष के आधार पर होना चाहिए

संवाद न्यूज एजेंसी

बिलासपुर। सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं ने एक मामले में प्रतिवादी की ओर से लिखित जवाब दाखिल करने में हुई देरी को स्वीकार करते हुए समय बढ़ाने का आवेदन मंजूर कर लिया। अदालत ने कहा कि न्याय का उद्देश्य मामले का फैसला केवल तकनीकी आधार पर करना नहीं, बल्कि उसके गुण-दोष के आधार पर निर्णय देना है।

प्रतिवादी ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 नियम 1 के तहत आवेदन दायर कर लिखित जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। आवेदन में देरी को जानबूझकर नहीं, बल्कि वास्तविक और सद्भावना के आधार पर हुई बताया गया। वादी पक्ष ने इसका विरोध करते हुए आवेदन खारिज करने की मांग की।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं की न्यायाधीश सिमरनजीत कौर ने आवेदन मंजूर कर लिया। अदालत ने कहा कि सिविल न्याय व्यवस्था में प्रक्रिया न्याय का साधन है। न्यायहित में आवेदन स्वीकार करना उचित है, ताकि मामला केवल तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि गुण-दोष के आधार पर तय हो। अदालत ने दर्ज किया कि लिखित जवाब पहले ही रिकॉर्ड पर मौजूद है। अब वादी पक्ष को रिप्लिकेशन दाखिल करने के लिए 6 अक्तूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।

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संवाद न्यूज एजेंसी

बिलासपुर। सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं ने एक मामले में प्रतिवादी की ओर से लिखित जवाब दाखिल करने में हुई देरी को स्वीकार करते हुए समय बढ़ाने का आवेदन मंजूर कर लिया। अदालत ने कहा कि न्याय का उद्देश्य मामले का फैसला केवल तकनीकी आधार पर करना नहीं, बल्कि उसके गुण-दोष के आधार पर निर्णय देना है।

प्रतिवादी ने सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 8 नियम 1 के तहत आवेदन दायर कर लिखित जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। आवेदन में देरी को जानबूझकर नहीं, बल्कि वास्तविक और सद्भावना के आधार पर हुई बताया गया। वादी पक्ष ने इसका विरोध करते हुए आवेदन खारिज करने की मांग की।

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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद सिविल जज कोर्ट नंबर-3 घुमारवीं की न्यायाधीश सिमरनजीत कौर ने आवेदन मंजूर कर लिया। अदालत ने कहा कि सिविल न्याय व्यवस्था में प्रक्रिया न्याय का साधन है। न्यायहित में आवेदन स्वीकार करना उचित है, ताकि मामला केवल तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि गुण-दोष के आधार पर तय हो। अदालत ने दर्ज किया कि लिखित जवाब पहले ही रिकॉर्ड पर मौजूद है। अब वादी पक्ष को रिप्लिकेशन दाखिल करने के लिए 6 अक्तूबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।

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