इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पेंशन में सीजनल सेवा को मान्य किया
कोर्ट ने कहा कि नियमितीकरण से पहले की सीजनल, अस्थायी या तदर्थ सेवा को न्यूनतम अर्हकारी सेवा में गिना जाना चाहिए। झांसी के सेवानिवृत्त कलेक्शन अमीन अलख प्रकाश मिश्रा के मामले में, 1984‑2008 और 2012‑2016 की सेवा जोड़ने से 10 साल की पात्रता पूरी होती है, और राज्य को आठ हफ्तों के भीतर पेंशन की गणना कर भुगतान करना होगा।

सौजन्य से:- Jagran
कर्मचारियों की पेंशन में सीजनल सेवा भी गिनी जाएगी, इलाहाबाद हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है कि कर्मचारियों की पेंशन के लिए सीजनल सेवा भी न्यूनतम अर्हकारी सेवा ...और पढ़ें
HighLights
- झांसी में सेवानिवृत्त कलेक्शन अमीन को मिली बड़ी राहत
- हाई कोर्ट ने आठ सप्ताह में भुगतान करने का आदेश दिया
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि कर्मचारियों की पेंशन के लिए सीजनल सेवा भी न्यूनतम अर्हकारी सेवा में गिनी जाएगी। नाम चाहे दैनिक, अस्थायी या सीजनल कुछ भी हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकलपीठ ने झांसी में कलेक्शन अमीन पद से सेवानिवृत्त अलख प्रकाश मिश्रा की याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा, नियमितीकरण से पूर्व सीजनल, अस्थायी या तदर्थ सेवा को पेंशन के लिए आवश्यक न्यूनतम अर्हकारी सेवा में गिना जाना चाहिए, भले ही पेंशन की वास्तविक गणना केवल नियमित सेवा के आधार पर की जाए।
याची फरवरी 1984 में सीजनल कलेक्शन अमीन नियुक्त हुआ। कई वर्षों तक अस्थायी आधार पर कार्य करने और कई बार अदालती लड़ाई लड़ने के बाद सितंबर 2016 में नियमित किया गया और नवंबर 2018 में स्थायी पुष्टि मिली। जुलाई 2019 में सेवानिवृत्त हो गए।
जिलाधिकारी/कलेक्टर ने पेंशन संबंधी दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि याची ने नियमित कर्मचारी के रूप में केवल दो वर्ष 10 माह की सेवा की है, जो पेंशन पात्रता के लिए अपर्याप्त है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के प्रेम सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और उदय प्रताप ठाकुर बनाम बिहार राज्य मामलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि नियमितीकरण से पूर्व की गई वर्क-चार्ज, तदर्थ या सीजनल सेवा को अर्हकारी सेवा में जोड़ा जाना चाहिए, ताकि कर्मचारी को न्यूनतम 10 वर्ष की पात्रता से वंचित न किया जाए।
कोर्ट ने पाया कि 1984 से 2008 और 2012 से 2016 तक की पूर्व सेवा जोड़ने पर याची 10 वर्ष की अर्हकारी सेवा की शर्त पूरी कर लेता है। कोर्ट ने प्रतिवादी को आदेश दिया है कि वे याची को पेंशन के लिए पात्र मानते हुए आठ सप्ताह के भीतर सभी सेवानिवृत्ति लाभों की गणना कर भुगतान करें। कोर्ट ने नियमितीकरण की मांग वाली इसी याची की पहली याचिका निष्प्रभावी घोषित करते हुए खारिज कर दी है। नियमितीकरण के लिए 2014 तथा पेंशन के लिए 2019 में याचिका दायर की गई थी।
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