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सुप्रीम कोर्ट ने MHA को CAPF में IPS डेपुटेशन के विवरण देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने गृह मंत्रालय को 46 IPS अधिकारियों के CAPF में डिप्यूटेशन संबंधी कैडर-वार जानकारी प्रस्तुत करने को कहा, जिसमें 13 अधिकारी BSF, 11 CISF, 9 CRPF, 6 ITBP और 7 SSB में नियुक्त थे। कोर्ट ने यह भी पूछताछ की कि क्या इस डिप्यूटेशन से पहले संबंधित विभाग की मांग की गई थी और दो साल में इस प्रक्रिया को कम करने का निर्देश दिया गया था।

7 सितंबर 2026 को 04:31 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने MHA को CAPF में IPS डेपुटेशन के विवरण देने का आदेश

सौजन्य से:- Navbharat Times

सुप्रीम कोर्ट की बेंच में गृह मंत्रालय का हलफनामा

- एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एएस चंदुरकर की बेंच ने तब दिया, जब गृह मंत्रालय ने कोर्ट को बताया कि 23 मई, 2025 के फैसले के बाद 46 इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) अधिकारियों को सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (SAG) के लेवल तक CAPFs में डेपुटेशन पर लाया गया था।

- गृह मंत्रालय (MHA) ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर बताया कि 46 IPS अधिकारियों में से 13 को BSF (8 DIG, 5 IG), 11 को CISF (9 DIG, 2 IG), नौ को CRPF (4 DIG, 5 IG), छह को ITBP (3 DIG, 3 IG) और सात को SSB (2 SP, 2 DIG, 3 IG) में डेपुटेशन पर भेजा गया था।

कैडर के हिसाब से विवरण मांगा गया था

MHA का यह हलफनामा 28 जुलाई, 2026 के उस आदेश के पालन में दायर किया गया था, जिसमें मंत्रालय से CAPF में डेपुटेशन पर लाए गए IPS अधिकारियों का कैडर-वार विवरण मांगा गया था। यह आदेश 23 मई, 2025 के उस फैसले के बाद दिया गया था जिसमें दो साल के दौरान ऐसे डेपुटेशन को धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया गया था।सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-क्या डेपुटेशन की विभाग से मांग की गई थी

बेंच ने अपने 2 सितंबर के आदेश में कहा, 'हम भारत सरकार के गृह मंत्रालय के सचिव को निर्देश देते हैं कि वे पांच CAPF में IPS अधिकारियों को डेपुटेशन पर लाने के संबंध में ऊपर दिए गए बयान को स्पष्ट करें। इन अधिकारियों को डेपुटेशन पर लाने से पहले क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी, यानी क्या डेपुटेशन के लिए संबंधित विभाग की ओर से कोई मांग (requisition) की गई थी।'क्या CAPF में कोई काबिल अफसर नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि 23 मई, 2025 के उस फ़ैसले के बावजूद उन्हें डेपुटेशन पर क्यों लाया गया, जिसमें कहा गया था कि CAPF के कैडर में SAG लेवल तक डेपुटेशन के लिए तय पदों की संख्या को धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए। जैसे कि यह ज्यादा से ज्यादा दो साल के अंदर होनी चाहिए। सुनवाई के दौरान, बेंच ने सवाल किया कि क्या CAPF में मैनेजमेंट लेवल के पदों को संभालने के लिए कोई काबिल अफसर नहीं हैं।4 अगस्त को केंद्र को जारी हुआ था नोटिस

- 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट, 2026 की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया था।

- इस एक्ट के तहत CAPF में सीनियर लेवल पर IPS अफसरों का डेपुटेशन जारी रखने की इजाजत दी गई थी। कोर्ट ने केंद्र से उस याचिका पर जवाब मांगा था जिसे 3,000 अफसरों के एक ग्रुप ने दायर किया था।

CAPF कैडर के अफसरों का ऊंचे पदों पर प्रमोशन मुश्किल

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस एक्ट की वजह से CAPF कैडर के अफसरों का लीडरशिप और दूसरे ऊंचे पदों पर प्रमोशन मुश्किल हो गया है। याचिका दायर करने वाले 3,000 अफसरों में से लगभग 1,500 CRPF से हैं और ज्यादातर ने अलग-अलग सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं में वीरता पुरस्कार पाने वाले और महिला अफसर भी शामिल हैं।एक कानून के खिलाफ क्यों हो गए याचिकाकर्ता

- याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि 2026 का एक्ट, 'संजय प्रकाश बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2025 के उस फैसले के खिलाफ था, जिसमें कहा गया था कि सभी CAPF में 'हायर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड' (HAG) के सभी पदों को सिर्फ डेपुटेशन के जरिए नहीं, बल्कि संबंधित फ़ोर्स के योग्य एग्जीक्यूटिव कैडर अधिकारियों से भरा जाना चाहिए।

- 23 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने यह भी फ़ैसला सुनाया कि CAPF के ग्रुप A एग्जीक्यूटिव कैडर अधिकारी सभी उद्देश्यों के लिए 'ऑर्गनाइज्ड ग्रुप A सर्विस' का हिस्सा हैं। कोर्ट ने केंद्र को यह भी निर्देश दिया कि वह अगले दो सालों में CAPF में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के स्तर तक IPS डेपुटेशन को धीरे-धीरे कम करे।

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