सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त को राजनीतिक दलों के ₹2000 से कम नकद दान पर वैधता के प्रश्न की सुनवाई तय की
सुप्रीम कोर्ट 31 अगस्त को आयकर अधिनियम की धारा 13ए(डी) के तहत राजनीतिक दलों को ₹2000 से कम नकद दान स्वीकार करने की वैधता पर याचिका की सुनवाई करेगा। दलील में कहा गया है कि यह प्रावधान पारदर्शिता की कमी से चुनावी शुद्धता को प्रभावित करता है। याचिकाकर्ता ने चुनाव आयोग को निर्देश देने के साथ चुनावी बांड योजना के रद्द फैसले का भी हवाला दिया है।

सौजन्य से:- Jagran
राजनीतिक दलों के नकद चंदे की वैधता पर 31 अगस्त को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट 31 अगस्त को राजनीतिक दलों को 2,000 रुपये से कम के नकद चंदे की अनुमति देने वाले आयकर अधिनियम के प्रावधान की वैधता पर सुनवाई करेगा।
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट 31 अगस्त को नकद चंदे पर सुनवाई करेगा।
- याचिका आयकर अधिनियम की धारा 13ए(डी) को चुनौती देती है।
- पारदर्शिता की कमी और चुनाव प्रक्रिया की शुचिता पर सवाल।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट राजनीतिक दलों को दो हजार रुपये से कम का नकद चंदा मिलने की अनुमति देने वाले आयकर अधिनियम के प्रविधान की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर 31 अगस्त को सुनवाई करेगा।
यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध है। पिछले साल 24 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब तलब किया था।
खेम सिंह भाटी द्वारा दायर इस याचिका में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13ए के खंड (डी) को असंवैधानिक घोषित कर रद करने की मांग की गई है। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि पारदर्शिता की कमी चुनाव प्रक्रिया की शुचिता को प्रभावित करती है।
इससे मतदाताओं को राजनीतिक फंडिंग के स्रोतों और दानदाताओं के बारे में जरूरी जानकारी नहीं मिल पाती, जो एक सूझबूझ भरा मतदान करने के लिए आवश्यक है।
इसके अलावा, याचिका में चुनाव आयोग को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि किसी भी राजनीतिक दल के पंजीकरण और चुनाव चिन्ह के आवंटન के लिए यह अनिवार्य किया जाए कि वह नकद में कोई राशि स्वीकार न करे।
याचिकाकर्ता ने अपनी दलील के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के उस 2024 के फैसले का भी हवाला दिया है, जिसमें चुनावी बांड योजना को रद कर दिया गया था। आयकर अधिनियम की धारा 13ए राजनीतिक दलों की आय से जुड़े विशेष प्रविधानों से संबंधित है।
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