होममुकदमे28 साल पुराने हादसे में पूर्व एसडीएम महेंद्र सिंह को बरी, हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा
मुकदमे

28 साल पुराने हादसे में पूर्व एसडीएम महेंद्र सिंह को बरी, हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 1998 के सड़क हादसे में अंबाला के पूर्व एसडीएम महेंद्र सिंह की बरी करने वाली निचली अदालत की सुनवाई को बरकरार रखा और पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने यह सिद्ध नहीं किया कि उन्होंने दुर्घटना के बाद वाहन हटाने या ड्राइवर को भागने के लिये प्रेरित किया, इसलिए कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

1 सितंबर 2026 को 06:32 am बजे
28 साल पुराने हादसे में पूर्व एसडीएम महेंद्र सिंह को बरी, हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा

सौजन्य से:- Jagran

'संदेह नहीं, सबूत चाहिए', 28 साल पुराने हादसे में पूर्व SDM बरी; हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला रखा बरकरार

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 28 साल पुराने सड़क हादसे में अंबाला के पूर्व एसडीएम महेंद्र सिंह को बरी करने का निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा है।

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। करीब 28 साल पुराने सड़क हादसे के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अंबाला के तत्कालीन एसडीएम महेंद्र सिंह को बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए निचली अदालत के बरी करने के फैसले को बरकरार रखा।

अदालत ने स्पष्ट किया कि हादसे के समय किसी व्यक्ति का वाहन में मौजूद होना मात्र इस बात का प्रमाण नहीं है कि उसने साक्ष्य मिटाने या आरोपित को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए कोई भूमिका निभाई थी।

जस्टिस मंदीप पन्नू ने कहा कि अभियोजन पक्ष को यह साबित करना जरूरी था कि महेंद्र सिंह ने चालक को वाहन लेकर घटनास्थल से भागने के लिए उकसाया या साक्ष्य मिटाने में किसी तरह की भूमिका निभाई। अदालत के सामने ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं आया।

मामला 20 जनवरी 1998 का है। अंबाला में एक युवक रिपन कुमार अपने दोस्त के साथ स्कूटर पर महाविद्यालय जा रहा था। इसी दौरान मोटर मार्केट में एसडीएम अंबाला की सरकारी जिप्सी ने स्कूटर को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद दोनों युवक ट्रक के पहियों के नीचे आ गए।

रिपन कुमार की अस्पताल ले जाते समय मृत्यु हो गई, जबकि उसके साथी की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। आरोप था कि जिप्सी चालक वाहन समेत मौके से फरार हो गया था।

मामले में चालक सोम नाथ को लापरवाही से वाहन चलाने का दोषी ठहराया गया था।

वहीं ट्रक चालक सुखदेव सिंह और तत्कालीन एसडीएम महेंद्र सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था।एसडीएम के खिलाफ आरोप था कि वह जिप्सी में चालक के साथ मौजूद थे और हादसे के बाद उन्होंने चालक को वाहन लेकर भागने के लिए उकसाया।

हाई कोर्ट ने पाया कि अभियोजन के मुख्य प्रत्यक्षदर्शी अरविंद गुप्ता ने जिप्सी को घटनास्थल से भागते हुए देखने की बात तो कही, लेकिन यह नहीं बताया कि महेंद्र सिंह ने चालक को भागने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा कि ऐसा कोई बयान भी नहीं है जिससे यह साबित हो कि महेंद्र सिंह ने वाहन हटाने में चालक की मदद की या साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई।

हाई कोर्ट ने कहा कि कुछ गवाहों के पक्षद्रोही हो जाने से अभियोजन के मामले पर संदेह पैदा हो सकता है, लेकिन मजबूत संदेह भी ठोस साक्ष्य का स्थान नहीं ले सकता। सरकारी गवाहों के तत्कालीन एसडीएम के अधीन काम करने के कारण उनके पक्षद्रोही होने की दलील भी अदालत को हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त नहीं लगी। अदालत ने दोहराया कि बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ पुनरीक्षण अधिकार बहुत सीमित है।

अदालत ने माना कि निचली अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद महेंद्र सिंह को संदेह का लाभ दिया था और उसके फैसले में कोई ऐसी गंभीर कानूनी त्रुटि नहीं थी, जिससे हाई कोर्ट के हस्तक्षेप की जरूरत पड़े। इसके साथ ही याचिका खारिज करते हुए महेंद्र सिंह की बरी की गई स्थिति बरकरार रखी गई।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सुपौल में 12 सितंबर को लोक अदालत, 16,600 ट्रैफ़िक‑परिवहन मामलों का त्वरित निपटारा, 90‑दिन पुराने चालानों पर 50% तक राहत
मुकदमे

सुपौल में 12 सितंबर को लोक अदालत, 16,600 ट्रैफ़िक‑परिवहन मामलों का त्वरित निपटारा, 90‑दिन पुराने चालानों पर 50% तक राहत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शरिया कोर्ट के आदेश को कानूनी मान्यता नहीं दी
मुकदमे

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शरिया कोर्ट के आदेश को कानूनी मान्यता नहीं दी

हरी झंडी दिखाकर शुरू, 12 सितंबर को हमीरपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन
मुकदमे

हरी झंडी दिखाकर शुरू, 12 सितंबर को हमीरपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

लखनऊ की पुलिस‑कानूनी सेवा मिलकर लोक अदालत का प्रचार करेंगे गांव-गांव
मुकदमे

लखनऊ की पुलिस‑कानूनी सेवा मिलकर लोक अदालत का प्रचार करेंगे गांव-गांव

सर्वर त्रुटि 500: अस्थायी व्यवधान
मुकदमे

सर्वर त्रुटि 500: अस्थायी व्यवधान

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल एवं कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगाई: बिना आरटीई, एनसीटीई, यूजीसी योग्यता के नहीं होंगे
मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल एवं कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति पर रोक लगाई: बिना आरटीई, एनसीटीई, यूजीसी योग्यता के नहीं होंगे

सर्वर त्रुटि 500 – पुनः प्रयास करें
मुकदमे

सर्वर त्रुटि 500 – पुनः प्रयास करें

500 सर्वर त्रुटि: अस्थायी समस्या
मुकदमे

500 सर्वर त्रुटि: अस्थायी समस्या

ताज़ा ख़बरें