गाज़ियाबाद में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, चेक बाउंस से पारिवारिक विवाद तक मामलों का समाधान
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार गाज़ियाबाद के जिला एवं सत्र न्यायालय में 12 सितंबर सुबह 10 बजे राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जाएगी, जिसका उद्देश्य आपसी सहमति से विवादों का शीघ्र निपटारा है। इसमें प्री‑लिटिगेशन तथा लंबित दोनों तरह के छोटे आपराधिक‑सिविल मामलों, चेक बाउंस, श्रम, भूमि, यूटिलिटी बिल, मोटर दुर्घटना क्लेम, बैंक रिकवरी और पारिवारिक‑विरासत के विवाद शामिल होंगे। अधिकारियों ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे इन मामलों के समाधान के लिए इस मंच का उपयोग करें।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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गाजियाबाद में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत:चेक बाउंस से लेकर पारिवारिक विवाद तक मामलों का होगा निपटारा
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गाजियाबाद के जिला एवं सत्र न्यायालय में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत लगेगी। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देश पर आयोजित होने वाली यह अदालत सुबह 10 बजे शुरू होगी। जिला न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष की देखरेख में होने वाले आयोजन का उद्देश्य आपसी सहमति से विवादों का आसान और जल्द निपटारा करना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव के मुताबिक, ऐसे मामलों को लोक अदालत में लिया जाएगा, जिनमें दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार हों। इसमें अदालत में लंबित मामलों के साथ प्री-लिटिगेशन विवाद भी शामिल किए जा सकते हैं। यानी कुछ मामलों को मुकदमा दर्ज होने से पहले ही सुलह के जरिए खत्म करने का मौका मिलेगा।
इन मामलों पर होगी सुनवाई
लोक अदालत में आपराधिक शमनीय मामलों के अलावा चेक बाउंस से जुड़े केस भी रखे जा सकेंगे। श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण के वाद और बिजली-पानी के बिल से जुड़े मामले भी समझौते के आधार पर निपटाए जाएंगे। दीवानी और फौजदारी के छोटे मामलों को भी दोनों पक्षों की सहमति से सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
क्लेम और बैंक रिकवरी के मामले भी शामिल
मोटर दुर्घटना से जुड़े क्लेम और बैंक रिकवरी के मामलों के लिए भी लोक अदालत में समाधान का रास्ता रहेगा। मोटर वाहन चालान से जुड़े मामलों को भी यहां निपटाया जा सकेगा। इसके अलावा पारिवारिक विवाद, उत्तराधिकार से जुड़े मामले और पति-पत्नी के बीच के विवादों को आपसी सहमति से खत्म कराने की कोशिश होगी।
प्री-लिटिगेशन मामलों को भी मिलेगा मौका
प्राधिकरण के अनुसार, जिन विवादों में अभी अदालत में मुकदमा दायर नहीं हुआ है, उन्हें भी प्री-लिटिगेशन स्तर पर लोक अदालत में लाया जा सकता है। इससे पक्षकारों को शुरुआती स्तर पर ही समझौते का विकल्प मिलेगा।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों के समाधान के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाएं।
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