ई-पेपर

रविवार, 9 अगस्त 2026 · दिल्ली संस्करण

पृष्ठ 1 / 7
100%
दैनिक ई-संस्करणनई दिल्ली
24x7 NYAYA — Legal News Network
न्याय ही सत्य है
रविवार, 9 अगस्त 2026हिंदी लीगल न्यूज़ नेटवर्कमूल्य ₹0 · डिजिटल
अपराध

न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका

LawStreet Journal के अनुसार · 24x7 NYAYA
न्यायालय की संवेदनशीलता पुस्तिका
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

सुप्रीम कोर्ट ने 'निर्णय और लिंग - निर्णय लिखने में संवेदनशीलता और करुणा' शीर्षक से एक व्यापक पुस्तिका जारी की है, जिसमें अदालतों को निर्णयों में संवेदनशीलता और करुणा का पालन करने का निर्देश दिया गया है. यह प्रयास विशेष रूप से यौन अपराधों और महिलाओं, बच्चों से जुड़े मामलों में असंवेदनशील भाषा के उपयोग की समस्या को संबोधित करने के लिए किया गया है.

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

अपराध

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

लाइव लॉ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय - 3 अगस्त - 9 अगस्त, 2026

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण आदेश और निर्णय पारित किए हैं। इनमें से एक आदेश में न्यायालय ने यह माना है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार राज्य पर ऐसी स्थितियाँ बनाने और बनाए रखने का सकारात्मक दायित्व डालता है जिनमें रोके जा सकने वाली आपदाओं में जान न जाए। इसे संस्थागत रूप से एक शिक्षा, प्रशासन और नीति में भीड़ के व्यवहार के विज्ञान को संस्थागत बनाना एक संवैधानिक अनिवार्यता माना जाएगा।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

संविधान

कानून के प्रसार में डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती जिम्मेदारी

विधि के प्रसार और शिक्षा संबंधी कानून (संशोधित) के मसौदे पर चर्चा के दौरान, प्रतिनिधियों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और एआई अनुप्रयोगों की जिम्मेदारियों को परिभाषित करने पर जोर दिया। उन्होंने कानूनी जानकारी के प्रसार में उनकी भूमिका के साथ-साथ सत्यापन और निगरानी तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

हाई कोर्ट

तरुण तेजपाल केस: बॉम्बे हाई कोर्ट का फ़ैसला, यह रही इसकी मुख्य बातें

बॉम्बे हाई कोर्ट ने तरुण तेजपाल केस का फ़ैसला देते हुए कहा कि सर्वाइवर का चरित्र और बर्ताव एक बड़ा सवाल चला आया है। जजों ने सर्वाइवर के बयानों की भी जांच की और उनमें से कुछ बिंदुओं पर सवाल उठाए हैं।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी।

24x7nyayanews.liveपृष्ठ 1 / 7