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मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी का बड़ा बयान, मध्य प्रदेश में UCC को शरीयत के खिलाफ बताया

मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी ने मध्य प्रदेश विधानसभा में पास किए गए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे शरीयत के खिलाफ बताया और कहा कि मुसलमान ऐसे कानून को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं.

23 जुलाई 2026 को 03:14 am बजे
मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी का बड़ा बयान, मध्य प्रदेश में UCC को शरीयत के खिलाफ बताया

सौजन्य से:- ABP News

'शरीयत के खिलाफ थोपे कानून को नहीं...', मध्य प्रदेश में UCC को लेकर भड़के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

Uniform Civil Code को लेकर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने इसे शरियत के खिलाफ बताया और कहा कि मुसलमान ऐसे कानून को मानने के लिए बाध्य नही हैं.

मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल को पास कर दिया गया है. जिसके बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा गया है. इस पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे शरियत के विरुद्ध बताया और कहा कि जो कानून शरियत के खिलाफ होगा मुसलमान उसे मानने के लिए बाध्य नहीं है.

मौलना शहाबुद्दीन ने कहा कि "मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता का मसौदा विधानसभा में पास हो गया है और अब उसे मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेज दिया गया है. वो मंजूर हो जाएगा और लागू भी हो जाएगा. लेकिन, एक ही महिला जस्टिस रंजना देसाई ही उत्तराखंड में, गुजरात में, असम में और अब मध्य प्रदेश ये मसौदा तैयार करने में क्यों लगी रही."

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मौलाना शहाबुद्दीन ने उठाए यूसीसी पर सवाल

मौलाना ने सवाल उठाया कि इसमें उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में काबायली, अनुसूचित जाति/जनजाति को यूसीसी से अलग रखा है. आखिर क्या ये लोग भारत के नागरिक नहीं है या सिर्फ निशाना मुसलमान हैं? ये भी तो भारत के नागरिक हैं इनको भी यूसीसी में शामिल करना चाहिए. इनको क्यों इससे अलग रखा है?

Bareily, Uttar Pradesh: On the Uniform Civil Code(UCC), Maulana Sahabuddin says, "In Madhya Pradesh, the Uniform Civil Code (UCC) has been approved by the Assembly and sent to the Governor for assent. While it is expected to be approved and implemented. But why only one woman,… pic.twitter.com/WY9UHYRPKp

— IANS (@ians_india) July 22, 2026

उन्होंने कहा कि भारत का संविधान कहता है कि स्टेट की राय ली जाएगी. जितने भी समुदाय, संप्रदाय के लोग हैं सबसे मशविरा लिया जाएगा. लेकिन मध्य प्रदेश की कमेटी ने किसी से मशविरा नहीं लिया, चंद जो उनके हम मिज़ाज लोगों का मशविरा लेकर यूसीसी विधानसभा में पास कर दिया गया. ये तो सरासर संविधान के विरुद्ध है. संविधान की इबारतें कुछ कह रही है और अमरतें कुछ हैं.

यूसीसी को बताया शरियत के खिलाफ

यूसीसी मुसलमान पर निशाना है और शरिया में सीधा-सीधा दख़ल है. मुसलमान बाध्य नहीं है. वो क़ानून का पालन करता है, अपने देश से प्रेम करता है लेकिन शरियत के खिलाफ थोपे गए कानून को मानने के लिए बाध्य नहीं है.

बता दें कि मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता बिल पास हो गया है. सीएम मोहन यादव ने इसे प्रदेश के लिए ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि इस क़ानून से समानता, सामाजिक न्याय और महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिलेगी. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. इसके बाद विवाह, संपत्ति और उत्तराधिकार में महिलाओं और पुरुषों के अधिकार समान होंगे.

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