होमसंविधानकॉलेजियम के फैसलों में पारदर्शिता की कमी पर जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की चिंता
संविधान

कॉलेजियम के फैसलों में पारदर्शिता की कमी पर जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की चिंता

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कॉलेजियम के कुछ फैसलों में पारदर्शिता की कमी पर चिंता व्यक्त की है, जिससे अवांछित उम्मीदवारों के लिए न्यायपालिका में प्रवेश करने और असंवैधानिक टिप्पणियां करने की गुंजाइश बनी है।

2 अगस्त 2026 को 03:15 am बजे
कॉलेजियम के फैसलों में पारदर्शिता की कमी पर जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की चिंता

सौजन्य से:- Jagran

'नागरिकों को जानने का हक है कि उनके जज कौन हैं', कॉलेजियम सिस्टम पर बोले जस्टिस उज्ज्वल भुइयां

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कॉलेजियम के कुछ फैसलों में पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई है, जिससे अवांछित उम्मीदवारों के न्यायपालिका में ...और पढ़ें

HighLights

- जस्टिस भुइयां ने कॉलेजियम की पारदर्शिता पर चिंता व्यक्त की।

- नागरिकों को जजों के फैसलों को जानने का अधिकार है।

- कारण न बताने से अयोग्य उम्मीदवारों को मौका मिलता है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आत्म-मंथन का आह्वान करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा है कि कॉलेजियम के कुछ फैसलों में पारदर्शिता की कमी रही है, जिससे अवांछित उम्मीदवारों के लिए न्यायपालिका में प्रवेश करने और असंवैधानिक टिप्पणियां करने की गुंजाइश बनी है।

जस्टिस भुइयां ने पूछा, "मैंने देखा है कि कॉलेजियम के पिछले तीन फैसलों में कोई कारण नहीं बताया गया है। क्या यह पारदर्शिता के सिद्धांत से पीछे हटने जैसा कदम है?" जस्टिस भुइयां ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के फैसलों के साथ पहले कुछ कारण बताए जाते थे भले ही वे पूरी तरह से विस्तृत न हों।

'जजों ने किस तरह के फैसले सुनाए, ये नागरिकों को जानने का अधिकार'

जज ने कहा, "कुछ लोग तो यह भी कह सकते हैं कि वे कुछ हद तक एक ही ढर्रे पर बने या कॉपी-पेस्ट जैसे थे लेकिन कम से कम उन सुझावों को सही ठहराने के लिए कुछ कारण तो बताए गए थे। जैसा कि हमने देखा है, प्लेटो से लेकर बेंथम तक नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि अदालतों में क्या हो रहा है। उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उनके जज कौन हैं। उन्हें यह जानने का अधिकार है कि जज ने किस तरह के फैसले सुनाए हैं। यह सब सार्वजनिक जानकारी में होना चाहिए।"

जस्टिस भुइयां ने याद दिलाया कि कॉलेजियम के कुछ पुराने प्रस्ताव काफी ज्यादा विस्तृत थे। 2022 में पूर्व चीफ जस्टिस यूयू ललित के कार्यकाल के दौरान जारी एक प्रस्ताव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उसमें सिफारिशों के लिए ठोस तर्क दिए गए थे।

खबरें और भी

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के 18 जनवरी, 2023 के उस प्रस्ताव का भी जिक्र किया, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के जज के तौर पर सौरभ कृपाल की नियुक्ति की सिफारिश को दोहराया गया था।

'सुप्रीम कोर्ट के तर्कों से मैं सहमत'

जस्टिस भुइयां ने कहा, "मैं कहूंगा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो कारण बताए हैं, वे काफी ठोस हैं। कम से कम मैं उन तर्कों से सहमत हूं।" हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि दोबारा सिफारिश किए जाने के बावजूद यह मामला तीन साल से ज्यादा समय से लंबित है।

उन्होंने कहा, "यह अलग बात है कि साढ़े तीन साल बीत चुके हैं और उसके बाद कुछ नहीं हुआ। लेकिन वह एक अलग बहस है और आज की बातचीत का हिस्सा नहीं है। हम उस पर किसी और समय चर्चा कर सकते हैं।"

जस्टिस भुइयां ने कहा कि जजों की नियुक्ति से जुड़े कॉलेजियम के प्रस्तावों में कारणों का खुलासा न करना जजों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है और यह जनहित के खिलाफ है। उन्होंने आगे कहा कि इससे अयोग्य उम्मीदवारों के लिए रास्ता खुल जाता है।

जस्टिस भुइयां ने कहा, "कारण न बताकर संस्थान असल में उन कई जजों का नुकसान करता है जो सचमुच बेहतरीन हैं और जिन्होंने बहुत अच्छा काम किया है। इसके उलट कारण न बताने से ऐसे लोगों के लिए न्यायपालिका में आने का रास्ता भी खुल जाता है जो बाद में लोगों के समूहों को चींटियां कह सकते हैं (उनके साथ किए गए व्यवहार के संदर्भ में) और ऐसी बातें कह सकते हैं जो पूरी तरह से असंवैधानिक हैं और संविधान के मूल्यों के खिलाफ हैं।"

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता पर सुप्रीम कोर्ट के जज की टिप्पणी
संविधान

न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता पर सुप्रीम कोर्ट के जज की टिप्पणी

वंदे मातरम कानून संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन, जमीयत उलमा-ए-हिंद ने जताया विरोध
संविधान

वंदे मातरम कानून संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन, जमीयत उलमा-ए-हिंद ने जताया विरोध

सीएपीएफ अधिकारियों ने नए कानून के प्रावधानों को चुनौती दी
संविधान

सीएपीएफ अधिकारियों ने नए कानून के प्रावधानों को चुनौती दी

सीएपीएफ अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, कैडर अधिकारी करियर प्रगति में बाधा का हवाला दे रहे
संविधान

सीएपीएफ अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, कैडर अधिकारी करियर प्रगति में बाधा का हवाला दे रहे

सीएपीएफ अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में नए कानून के खिलाफ मामला चलाया
संविधान

सीएपीएफ अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में नए कानून के खिलाफ मामला चलाया

सुप्रीम कोर्ट ने NSE को RTI के दायरे के बाहर रखा
संविधान

सुप्रीम कोर्ट ने NSE को RTI के दायरे के बाहर रखा

खाद्य संरक्षण कानून में सुधार: जोखिम प्रबंधन के लिए 4 नीतियां
संविधान

खाद्य संरक्षण कानून में सुधार: जोखिम प्रबंधन के लिए 4 नीतियां

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज किया
संविधान

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरक्षण व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज किया

ताज़ा ख़बरें