SC ने पटना हाई कोर्ट के ‘रेप नहीं’ आदेश पर स्वत: संज्ञान लिया, कुछ टिप्पणी को आपत्तिजनक कहा
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के इस फैसले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि महिला की सलवार उतारने की कोशिश और छाती दबाकर छेड़छाड़ को ‘रेप की कोशिश’ नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कुछ हाई कोर्ट की बातों को आपत्तिजनक बताया और आरोपी को सुनने के बाद ही सजा रद्द करने को कहा, साथ ही अधिवक्ता जनरल से सजा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

सौजन्य से:- etvbharat.com
‘कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां हैं’, SC ने रेप की कोशिश के मामले में पटना हाई कोर्ट के आदेश पर स्वत: संज्ञान लिया
पटना हाई कोर्ट के हाल के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कड़ी टिप्पणी की है.
By Sumit Saxena
Published : September 23, 2026 at 1:52 PM IST
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पटना हाई कोर्ट के उस आदेश पर खुद से संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया था कि किसी महिला की सलवार उतारने की कोशिश और उसकी छाती दबाकर छेड़छाड़ करने के आरोप 'रेप की कोशिश' नहीं माने जाते.
यह मामला सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के सामने आया. पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट की कुछ बातें आपत्तिजनक थीं. पीठ ने बिहार के एडवोकेट जनरल एसडी संजय से कहा, "कुछ आपत्तिजनक बातें हैं." पीठ ने कहा, "हम आरोपी को सुनने के बाद ही सजा रद्द कर पाएंगे... आप कृपया स्थानीय पुलिस के जरिए यह पक्का करें कि उसे सजा मिल जाए."
इस साल जुलाई में एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के सामने हाई कोर्ट के आदेश का जिक्र किया. यह तर्क दिया गया कि सुप्रीम कोर्ट के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर खुद संज्ञान लेने और उसे रद्द करने के बावजूद, पटना हाई कोर्ट ने वैसे ही तथ्यों के आधार पर और वैसे ही टिप्पणियां करते हुए आदेश पास किया.
हाई कोर्ट ने माना कि एक महिला की सलवार उतारने की कोशिश करने और उसकी छाती दबाकर उसके साथ छेड़छाड़ करने के आरोप रेप की कोशिश का अपराध नहीं बनते. हाई कोर्ट ने ये बातें बिहार के अमरपुर में 2008 के एक मामले में रेप की कोशिश के लिए एक आदमी की सजा को रद्द करते हुए कहीं.
आरोपी को ट्रायल कोर्ट ने रेप की कोशिश और गलत तरीके से कैद करने का दोषी ठहराया था.हालांकि, हाई कोर्ट ने माना कि अभियोग पक्ष रेप की कोशिश का अपराध साबित करने में नाकाम रहा.
ये भी पढ़ें- ‘विशेषज्ञ निकाय नहीं’: सुप्रीम कोर्ट ने लॉ कॉलेजों पर BCI के कंट्रोल की सीमाएं बताईं
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाई कोर्ट के निर्णय को चुनौती दी: सलवार हटाना व छाती दबाना ‘बलात्कार का प्रयास’ नहीं माना गया

नोएडा डीएम मेधा रूपम के खिलाफ हाईकोर्ट के 5 लाख जुर्माने के आदेश को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा आदेश जारी

भारत ने पाकिस्तान के यूएन पत्र को झूठा कहा, इन्डस जल संधि विवाद में बढ़ी तनाव

कोलकाता हाई कोर्ट ने टुलु मंडल के खिलाफ गैर‑जमानती वारंट को बरकरार रखा, विदेश यात्रा को कारण ठहराया

EC ने सभी निर्णयों को एकमत बताया, SIR में आंतरिक मतभेद के दावे खारिज

18 वर्षीय छात्र की गुरु हत्या पर कोर्ट ने दी उम्रकैद, मौत की सजा नहीं हुई

अल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने तलाक के बाद भी सेक्शन 125 के तहत भरण‑पोषण का अधिकार मान्य किया

दिल्ली हाई कोर्ट ने युवा ओलिंपिक के लिए घुड़सवारी चयन प्रक्रिया को बरकरार रखा
ताज़ा ख़बरें
- अवैध खनन में मारे गए वन रेंजर की हत्या पर सुप्रीम कोर्ट ने किया रोकथाम डिटेंशन का आदेश
- बीसीआई के चेयरमैन को हटाने की मांग, चुनाव में हस्तक्षेप रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका
- सुप्रीम कोर्ट में सवाल: क्या BCI को कानून कॉलेजों का नियमन करने का अधिकार है?
- केरला उच्च न्यायालय ने रिपोर्टर टीवी के MD एंटो ऑगस्टीन को शराब के कब्ज़े के मामले में जमानत मंज़ूर की
- AI के भविष्य से जुड़े निर्णयों में बच्चों की भागीदारी आवश्यक
- सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल के शैक्षणिक नियामक अधिकार और फंड ट्रांसफर पर नोटिस जारी किया
- बार परिषद के निर्णय एकतरफ़ा, AG व SG को सूचनाओं में अनदेखी – सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका
- कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर लोकतंत्र के हमले का आरोप, आंतरिक झगड़े की रिपोर्टें उजागर

