पत्नी, बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता का भरण-पोषण पति का 'पवित्र दायित्व': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मनुस्मृति के श्लोक का दिया हवाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पत्नी, नाबालिग बच्चों और आर्थिक रूप से असमर्थ बुजुर्ग माता-पिता का भरण-पोषण करना पति का न केवल कानूनी, बल्कि 'पवित्र दायित्व' भी है। कोर्ट ने इस संदर्भ में मनुस्मृति के अध्याय 11, श्लोक 10 का हवाला दिया। जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की पीठ ने यह टिप्पणी कानपुर नगर की फैमिली कोर्ट द्वारा निर्धारित भरण-पोषण राशि बढ़ाने की मांग को लेकर पत्नी की ओर से दाखिल क्रिमिनल रिवीजन पर सुनवाई करते हुए की। कोर्ट ने मनुस्मृति के श्लोक को उद्धृत किया: “वृद्धौ च मातापितरौ साध्वी भार्या सुतः शिशुः। अपकार्यशतं कृत्वा भर्तव्या मनुर्ब्रवीत॥” कोर्ट द्वारा दिए

सौजन्य से:- लाइव लॉ हिंदी
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पत्नी, नाबालिग बच्चों और आर्थिक रूप से असमर्थ बुजुर्ग माता-पिता का भरण-पोषण करना पति का न केवल कानूनी, बल्कि 'पवित्र दायित्व' भी है। कोर्ट ने इस संदर्भ में मनुस्मृति के अध्याय 11, श्लोक 10 का हवाला दिया। जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की पीठ ने यह टिप्पणी कानपुर नगर की फैमिली कोर्ट द्वारा निर्धारित भरण-पोषण राशि बढ़ाने की मांग को लेकर पत्नी की ओर से दाखिल क्रिमिनल रिवीजन पर सुनवाई करते हुए की। कोर्ट ने मनुस्मृति के श्लोक को उद्धृत किया: “वृद्धौ च मातापितरौ साध्वी भार्या सुतः शिशुः। अपकार्यशतं कृत्वा भर्तव्या मनुर्ब्रवीत॥” कोर्ट द्वारा दिए
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