बाबूलाल मरांडी ने कहा MMDR कानून से झारखंड की कोयला कीमतें बढ़ेंगी, उद्योगों को होगा नुकसान
मरांडी ने बताया कि 450 रुपये प्रति टन की सेस लागू होने से झारखंड के कोयले और आयरन की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे पावर और स्टील प्लांटों की उत्पादन लागत बढ़ेगी और कंपनियां अन्य राज्यों से कोयला खरीदना चुन सकती हैं। उन्होंने यह भी उजागर किया कि साढ़े छह साल में राज्य में नए उद्योग नहीं बने और मौजूदा उद्योग कई कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। बीजेपी नेता का मानना है कि MMDR कानून देश और झारखंड दोनों के हित में है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
बाबूलाल मरांडी ने MMDR कानून को बताया झारखंड के हित में, कहा- राज्य सरकार के सेस से होता बड़ा नुकसान
पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में MMDR कानून को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है.
Published : September 20, 2026 at 8:19 PM IST
बोकारो: पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में MMDR कानून को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने 450 रुपये प्रति टन सेस पर भी सवाल उठाए हैं. बोकारो में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बाबूलाल मरांडी ने कहा कि कोयला और आयरन की कीमत उनके ग्रेड के आधार पर निर्धारित होती है. ऐसे में प्रति टन 450 रुपये सेस लगाए जाने से झारखंड में उत्पादित खनिजों की कीमत बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर उद्योगों पर पड़ेगा.
कोयला महंगा होने पर बढ़ेगी उत्पादन की लागत
मरांडी ने कहा कि कोयले का इस्तेमाल पावर प्लांट, स्टील प्लांट समेत कई उद्योगों में होता है. कोयला महंगा होने पर बिजली और स्टील के उत्पादन की लागत भी बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि यदि झारखंड का कोयला महंगा हुआ तो कंपनियां सीसीएल और बीसीसीएल से खरीदारी करने के बजाय दूसरे राज्यों से कोयला लेने का विकल्प चुन सकती हैं.
'झारखंड में नहीं लगे नए उद्योग': बाबूलाल मरांडी
उन्होंने कहा कि इसका असर राज्य के कोयला उत्पादन, उद्योग और रोजगार पर पड़ सकता है. बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि साढ़े 6 साल में झारखंड में नए उद्योग लगाने की दिशा में अपेक्षित काम नहीं हुआ है और पुराने उद्योग भी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं.
झारखंड कते हित में हैं MMDR कानून: बीजेपी नेता
MMDR कानून को लेकर बीजेपी नेता ने कहा कि केंद्र सरकार का यह कानून देश और झारखंड के हित में है. उनके अनुसार, पूरे देश में कोयले की कीमत को एक समान करने से झारखंड से बाहर की कंपनियों के लिए यहां से कोयला खरीदना आसान होगा, जिससे राज्य के खनन और औद्योगिक क्षेत्र को लाभ मिल सकता है.
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झारखंड सरकार की नीतियों से उद्योग और रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है- बाबूलाल मरांडी
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