टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को विदेश जाने की अनुमति न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं दी गई थी. बनर्जी का कहना है कि वे आंखों के इलाज के लिए विदेश जाना चाहते हैं, लेकिन हाई कोर्ट ने इसकी अनुमति नहीं दी है.

सौजन्य से:- ETV Bharat
आंखों के इलाज के लिए विदेश जाना चाहते हैं अभिषेक बनर्जी, हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
By Sumit Saxena
Published : July 30, 2026 at 3:22 PM IST
नई दिल्लीः टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिसमें उन्हें आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं दी गई थी. बनर्जी ने हाई कोर्ट की एकल-न्यायाधीश पीठ द्वारा 20 जुलाई को पारित आदेश को चुनौती दी है. इस मामले पर अभी सुनवाई होनी बाकी है.
हाई कोर्ट ने कहा था कि जांच चलने के दौरान वह याचिकाकर्ता को विदेश जाने की अनुमति देने के पक्ष में नहीं है. जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि कोलकाता में कई प्रतिष्ठित आई क्लीनिक हैं. जस्टिस भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से कहा कि टीएमसी सांसद को सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के नेत्र विज्ञान प्रमुख के सामने पेश होना चाहिए, जो यह तय करेंगे कि बनर्जी की आंख की समस्या का इलाज वहां हो सकता है या नहीं.
इससे पहले, हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर डराने-धमकाने वाले बयान देने से जुड़े एक मामले में बनर्जी को दंडात्मक कार्रवाई से मिली अंतरिम सुरक्षा 6 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी. हाई कोर्ट के जज जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने बनर्जी को जांच में सहयोग करने और अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा न करने का निर्देश दिया, जैसा कि पहले आदेश दिया गया था.
जज ने बनर्जी को मिली अंतरिम सुरक्षा को 6 अक्टूबर तक या अगले आदेश तक (जो भी पहले हो) बढ़ा दिया और कहा कि अंतरिम सुरक्षा देने की शर्तों में संशोधन के लिए टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव की याचिका पर अगस्त में सुनवाई होगी, लेकिन कोई खास तारीख तय नहीं की. बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले 27 अप्रैल को एक जनसभा में एक प्रतिद्वंद्वी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई अपनी कथित टिप्पणियों को लेकर दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने की मांग की थी.
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