अमेरिकी टैरिफ नियमों से भारतीय निर्यात में बढ़ी अनिश्चितता
नई अमेरिकी टैरिफ नीति से भारत के निर्यातकों को चिंता है, क्योंकि संभावित शुल्क वृद्धि से अमेरिकी बाजार में उनका व्यापार प्रभावित हो सकता है। उद्योग प्रतिनिधियों ने इस अनिश्चित माहौल को मौजूदा कच्चे माल की कीमतों और परिवहन लागत में बढ़ोतरी के साथ जोड़ते हुए कहा कि यह भारत‑अमेरिका व्यापार के स्थायित्व को चुनौती देगा।

सौजन्य से:- Hindustan
भारतीय निर्यात, कारोबार पर अमेरिका नए कानून का साया
नई दिल्ली में अमेरिकी कानूनों के तहत नए टैरिफ से भारतीय कारोबार पर चिंता का साया मंडरा रहा है। निर्यातकों का मानना है कि टैरिफ बढ़ने से अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों में अनिश्चितता आएगी। प्रमुख उद्योगपतियों ने इस मुद्दे पर चिंता जताई है और भारत की नज़रें वॉशिंगटन की नीतियों पर हैं।
नई दिल्ली, एजेंसी। रूस को घेरने के लिए लागू हुए नए अमेरिकी कानून का साया भारतीय कारोबार पर भी मंडराने लगा है। रूस के साथ मजबूत व्यापारिक रिश्तों के बीच, अमेरिकी नीतियों में कोई भी नई सख्ती भारतीय आयात-निर्यात के समीकरण बिगाड़ सकती है। निर्यातकों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिलने से कारोबार पर असर हो सकता है। इससे दोनों देशों के बीच कुछ समय से मजबूत होते नजर आ रहे व्यापारिक संबंधों को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है। कूटनीति और कारोबार के इस मुश्किल मोर्चे पर अब भारत की नजरें वॉशिंगटन के अगले रुख पर टिकी हैं।
भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा, ‘हम बहुत चिंतित हैं। अगर अमेरिका ऊंचा शुल्क लगाता है तो इससे अमेरिका को हमारा निर्यात पूरी तरह रुक जाएगा। कोई भी आयातक इतने ऊंचे शुल्क को वहन नहीं कर सकता।’ उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग क्षेत्र के कई निर्यातकों का अमेरिका में महत्वपूर्ण कारोबार है और नए शुल्क पर कोई फैसला लेने से पहले अमेरिका को इन पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए।मुंबई के निर्यातक और टेक्नोक्राफ्ट इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शरद सराफ ने कहा कि शुल्क से ज्यादा अनिश्चित माहौल का असर पड़ता है। उन्होंने कहा, ‘इसका स्पष्ट असर तभी आंका जा सकता है जब हमारे पास पूरी जानकारी हो। हमें यह भी देखना होगा कि चीन जैसे हमारे प्रतिस्पर्धी देशों पर कितना शुल्क लगाया जाता है। हम नए कानून को लेकर काफी चिंतित हैं क्योंकि इससे अब तक मजबूत रहे व्यापारिक संबंधों में काफी अनिश्चितता पैदा हो रही है। हम फैसले नहीं ले पा रहे हैं।’ प्रमुख चमड़ा और जूता निर्यातक तथा फरीदा ग्रुप के चेयरमैन रफीक अहमद ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे माल की कीमतें और परिवहन लागत पहले ही बढ़ चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी के कुल निर्यात का 65 प्रतिशत अमेरिका को जाता है और शुल्क में कोई भी अतिरिक्त बढ़ोतरी इन निर्यात खेपों को प्रभावित करेगी।
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