शेख हसीना की वापसी पर गिरफ्तारी तय, बांग्लादेश के कानून मंत्री का बड़ा बयान
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत से लौटते ही गिरफ्तार किया जा सकता है, कानून मंत्री ने कहा कि उन्हें सरेंडर करने का मौका नहीं मिलेगा. हसीना ने कहा है कि वह दिसंबर तक अपने देश लौटने के लिए तैयार हैं.

सौजन्य से:- AajTak
Sign In
Advertisement
X
बांग्लादेश के कानून मंत्री एम असदुज्जमां ने गुरुवार को कहा कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत से लौटने पर उनके सरेंडर करने से पहले उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा. बांग्लादेश के कानून मंत्री एम असदुज्जमां ने कहा है कि उन्हें तुरंत गिरफ्तार किए जाने की संभावना है, इससे पहले कि उन्हें सीधे अदालत में सरेंडर करने का मौका मिले.
बांग्लादेश सरकार का यह बयान एक दिन बाद आया है जब हसीना ने एक समाचार एजेंसी से कहा था कि अपनी जान को खतरा होने के बावजूद वह दिसंबर तक अपने देश लौटने के लिए दृढ़ हैं. शेख हसीना ने कहा कहा, "हो सकता है कि मेरी हत्या कर दी जाए. हो सकता है कि मुझे गिरफ्तार कर लिया जाए. हो सकता है कि मुझे जेल भेज दिया जाए... मुझे अपनी किस्मत के बारे में पूरी जानकारी है. फिर भी मैं वापस जाना चाहती हूं क्योंकि मेरे लोग मुझे बुला रहे हैं."
इस महीने की शुरुआत में उनके कुछ और इंटरव्यू सामने आए जिनसे पता चला कि वह अपनी पार्टी के साथियों के साथ इस साल के आखिर तक बांग्लादेश लौटने की संभावना पर चर्चा कर रही थीं.
असदउज्जमां ने कहा कि 78 साल की हसीना को लौटने का हक है, लेकिन "कानून अपना काम करेगा और हम ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिससे कानून का उल्लंघन हो."
Advertisement
मंत्री ने पत्रकारों से कहा, "मौत की सज़ा पाए होने और बांग्लादेशी नागरिक होने के बावजूद अगर वह देश लौटकर और कानून का सम्मान करते हुए सरेंडर करना चाहती हैं, तो हो सकता है कि ऐसा करने से पहले ही उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाए. हम उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे जो कानून ने हमें दिया है."
जब मंत्री असदउज्जमां से पूछा गया कि उनके बाद आई अंतरिम सरकार ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया था, तो वह कैसे बांग्लादेश वापस आ सकती हैं, तो मंत्री असदुज्जमां ने कहा, 'यह उनकी प्रॉब्लम है, मेरी नहीं.'
उन्होंने कहा, "जब भी वह हमारे इलाके में आएंगी, मैं कानून के तहत मुझे जो अधिकार दिया है, उसे लागू करूंगा."
अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्रों के हिंसक सड़क विरोध प्रदर्शनों के बाद हसीना की सरकार गिरा दी गई थी, जिसके बाद हसीना भारत आ गईं थीं.
जैसे ही अंतरिम सरकार ने चार्ज संभाला एक स्पेशल कोर्ट ने एंटी-टेरर कानून के तहत एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के तहत हसीना की पॉलिटिकल पार्टी अवामी लीग को भंग कर दिया.
नवंबर 2025 में 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक कार्रवाई में अपनी भूमिका के लिए 'इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल' ने हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया और उनकी गैर-मौजूदगी में उन्हें मौत की सज़ा सुनाई.
Advertisement
एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं ने इस कानूनी प्रक्रिया को "खामियों वाला" बताया है, जबकि संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं.
इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश में चुनाव हुए जिसके बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता में आई और तारिक रहमान ने नए प्रधानमंत्री के तौर पर कार्यभार संभाला. बांग्लादेश काफी समय से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है.
---- समाप्त ----
Latest News in Hindi »
Advertisement
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
इलाहाबाद हाई कोर्ट का सख्त फैसला- संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत FIR दर्ज करें!

बंगाल: सिलीगुड़ी कॉलेज हिंसा मामले में तृणमूल छात्र नेता पर अदालत परिसर में विरोध

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: पैलेट गन से घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज शुरू करे दिल्ली सरकार

शिवसेना के नाम-सिंबल विवाद पर सुनवाई: 'एक नेता पूरी पार्टी नहीं'

दिल्ली कोर्ट ने आइशी घोष के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट रद्द किया

अकाल तख्त का पंजाब सरकार को अल्टीमेटम, बेअदबी कानून पर आम सहमति तक विधानसभा में न हो चर्चा

दिल्ली की अदालत ने साइबर ठगी के आरोपी को दुबई यात्रा की मंजूरी दी

एंटी पेपर लीक कानून: जानें कैसे बदल जाएगा एग्जाम सिस्टम और छात्रों पर क्या होगा असर
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दंगा मामले में जवाब मांगा
- परीक्षा धोखे से मुक्ति: नया एंटी-पेपर लीक कानून, कौन कौन सजा भोगेगा और कैसे
- सुप्रीम कोर्ट में सेंथिल बालाजी की याचिका पर सुनवाई, क्या मिलेगी गिरफ्तारी से पहले जमानत?
- सुप्रीम कोर्ट ने भगवंत मान समेत AAP नेताओं को नोटिस भेजा, चुनाव प्रचार में थे इन दंगों के दोषी
- Madras उच्च न्यायालय ने डीवीएसी भ्रष्टाचार मामले में पूर्व द्रमुक मंत्री सेंथिल बालाजी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया
- टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को विदेश जाने की अनुमति न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका
- अकाल तख्त ने पंजाब सरकार के जवाब को खारिज किया, बेअदबी कानून पर एक्सपर्ट कमेटी बनाई
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पूर्व मुवक्किल के मामले में जज को खुद को अलग कर लेना चाहिए था

