अभिजीत दीपके का सुप्रीम कोर्ट पर हमला, पूछा- हर व्यक्ति को गोली खानी चाहिए?
सुप्रीम कोर्ट के जज पर सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने निशाना साधा है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बारे में कहा कि आम इंसान के लिए क्या उम्मीद बचती है जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विपक्ष के नेताओं के खिलाफ गलत टिप्पणियां करते हैं.

सौजन्य से:- Prabhat Khabar
महुआ मोईत्रा पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से भड़के अभिजीत दीपके, पूछा- क्या सब सीने पर गोली खायें?
अभिजीत दीपके, सुप्रीम कोर्ट और महुआ मोईत्रा.
Abhijeet Dipke on Supreme Court: महुआ मोईत्रा की याचिका पर सुनवाई के दौरान ‘अंडे से डर’ वाली सुप्रीम कोर्ट के जज की टिप्पणी पर CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. दीपके ने पूछा- क्या सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि सब गोलियां खायें?
Abhijeet Dipke on Supreme Court: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोईत्रा की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणी पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके (Abhijeet Dipke) ने कड़ा ऐतराज जताया है. अभिजीत दीपके ने सुप्रीम कोर्ट की भाषा और मंशा पर सवाल उठाये हैं.
दीपके ने पूछा- आम इंसान के लिए क्या उम्मीद बचती है?
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर अपने गुस्से का इजहार करते हुए लिखा- क्या अब सुप्रीम कोर्ट चाहता है कि हर व्यक्ति सीने पर गोली खाये? जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश विपक्ष के नेताओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणियां करते हैं, तो आम इंसान के लिए क्या उम्मीद बचती है?
दीपके का यह बयान सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जज ने महुआ मोईत्रा के वकील से कहा था कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने गोलियां खायीं हैं. आप अंडे से डर रहीं हैं? ममता बनर्जी की पार्टी की सांसद महुआ मोईत्रा ने कोर्ट से आग्रह किया था कि उन्हें थाने में व्यक्तिगत पेशी से छूट दी जाये, क्योंकि उन्हें डर है कि उन पर अंडे फेंके जा सकते हैं.
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महुआ के वकील की दलील और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
लोगों की भावनाओं को आहत करने संबंधी एक बयान के बाद पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के होगलाबेरिया थाने में महुआ के खिलाफ एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गयी थी. इस मामले की जांच के लिए उन्हें 14 अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया गया है. महुआ मोईत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर वर्चुअल (ऑनलाइन) माध्यम से पूछताछ में शामिल होने की अनुमति मांगी थी.
उनके वकील ने कहा कि थाने में उपस्थिति के दौरान उन पर अंडे या टमाटर फेंके जा सकते हैं. इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा था- जब आप राजनीति में उतर चुके हैं, तो अंडे से क्यों डर रहे हैं? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने तो सीने पर गोलियां खायीं थीं.
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सुप्रीम कोर्ट के रुख पर सोशल मीडिया पर बंटा जनमत
अदालत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गयी है. कई लोगों ने शीर्ष अदालत की टिप्पणी को अनुचित और विपक्षी नेताओं के प्रति कठोर बताया, तो अभिजीत दीपके के बयान को आम नागरिकों के सुरक्षा अधिकारों से जोड़कर भी देखा जा रहा है. अदालत के रुख को देखते हुए महुआ मोईत्रा के वकील को अंततः याचिका वापस लेनी पड़ी थी. अब उन्हें 14 अगस्त को पुलिस के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा.
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By मिथिलेश झा
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