परीक्षा धोखे से मुक्ति: नया एंटी-पेपर लीक कानून, कौन कौन सजा भोगेगा और कैसे
केंद्र सरकार ने देश के छात्रों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। नई लोक परीक्षा अनुचित साधनों का निवारण विधेयक (एंटी-पेपर लीक कानून) को पारित कर देश को एक सख्त एंटी-पेपर लीक कानून दिया है। यह कानून परीक्षाओं में पेपर लीक, फसटन, हैकिंग और अन्य धोखाधड़ी को रोकने के लिए है। नए कानून में 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना है।

सौजन्य से:- AajTak
Sign In
Advertisement
X
NEET-UG विवाद से लेकर विभिन्न राज्यों में रद्द हुई भर्ती परीक्षाओं के बाद आखिरकार देश को नया और सख्त 'एंटी-पेपर लीक कानून' (लोक परीक्षा अनुचित साधनों का निवारण विधेयक) मिल गया है. लोकसभा से पास होने के बाद अब इस बिल ने कानून का रूप ले लिया है.
हर साल देश के करोड़ों युवा सालों-साल तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा के दिन अचानक पता चलता है कि 'पेपर लीक' हो गया. पिछले महीने जंतर मंतर पर इसका आक्रोश भी जमीन पर नजर आया. अब इस धांधली को जड़ से खत्म करने के लिए मोदी सरकार यह ऐतिहासिक कानून लेकर आई है. लेकिन आम छात्रों के मन में सवाल है कि इस कानून में ऐसा क्या खास है? दोषी कैसे पकड़े जाएंगे? और इसका आम अभ्यर्थियों पर क्या असर पड़ेगा? आइए, आसान और सरल भाषा में समझते हैं इस नए कानून का पूरा लेखा-जोखा...
किन-किन परीक्षाओं पर लागू होगा यह कानून?
यह कानून देश की सभी प्रमुख केंद्रीय एजेंसियों द्वारा आयोजित की जाने वाली राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं पर लागू होगा. इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी): NEET, JEE, CUET जैसी परीक्षाएं.
UPSC (संघ लोक सेवा आयोग): सिविल सर्विसेज, एनडीए, सीडीएस आदि.
SSC (कर्मचारी चयन आयोग): CGL, CHSL और अन्य केंद्रीय भर्ती परीक्षाएं.
RRB (रेलवे भर्ती बोर्ड): रेलवे की तमाम गैर-तकनीकी और तकनीकी भर्ती परीक्षाएं.
IBPS (इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सिलेक्शन): बैंकों में क्लर्क और पीओ भर्ती परीक्षा.
केंद्रीय मंत्रालयों व विभागों के तहत आने वाले सभी सरकारी भर्ती टेस्ट.
Advertisement
(ध्यान रहे: राज्य स्तर की बोर्ड परीक्षाओं या राज्य लोक सेवा आयोगों को इसमें सीधे शामिल नहीं किया गया है, लेकिन केंद्र ने राज्यों को भी इसी मॉडल पर कानून बनाने की सलाह दी है.)
इस नए कानून में क्या-क्या 'अपराध' माना जाएगा?
अगर कोई व्यक्ति या संस्था नीचे दिए गए 5 कामों में से कुछ भी करती है, तो वह इस नए कानून के तहत गैर-जमानती अपराध होगा:
परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी (Answer Key) लीक करना या उसमें सेंध लगाना.
बिना अनुमति के प्रश्न पत्र या ओएमआर शीट को अपने पास रखना.
परीक्षा के दौरान किसी उम्मीदवार की अनधिकृत तरीके से मदद करना या कंप्यूटर नेटवर्क से छेड़छाड़ या हैकिंग करना.
फर्जी वेबसाइट बनाना या फर्जी एडमिट कार्ड और परीक्षा से जुड़ी गलत जानकारी फैलाना.
मेरिट लिस्ट या उम्मीदवारों की रैंक में गड़बड़ी करना.
कितनी मिलेगी सजा और कितना लगेगा जुर्माना?
सरकार ने इस कानून में इतनी सख्त सजा का प्रावधान किया है कि पेपर लीक माफिया के रोंगटे खड़े हो जाएंगे. इस कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति गड़बड़ी में शामिल पाया जाता है, तो उसे 3 से 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भरना होगा.
संगठित अपराध (पेपर लीक माफिया/सिंडिकेट): अगर कोई पूरा गिरोह या कोचिंग संस्थान का नेटवर्क इसमें शामिल पाया गया, तो दोषियों को 5 से 10 साल तक की सख्त कैद और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना होगा.
Advertisement
सेवा प्रदाता (सर्विस प्रोवाइडर/एजेंसियां): अगर परीक्षा कराने वाली प्राइवेट एजेंसी या कंप्यूटर लैब धांधली में लिप्त पाई जाती है, तो उस पर 10 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा और परीक्षा का पूरा खर्च भी उसी एजेंसी से वसूला जाएगा. साथ ही, ऐसी कंपनियों को 4 साल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा.
क्या मासूम छात्रों को भी मिलेगी सजा?
नहीं! छात्रों को इस कानून के तहत किसी भी तरह के आपराधिक दंड (जेल या आर्थिक जुर्माना) से पूरी तरह बाहर रखा गया है. सरकार का साफ मानना है कि परीक्षार्थी पीड़ित (Victim) होते हैं, अपराधी नहीं. हालांकि, अगर कोई छात्र परीक्षा में नकल करते हुए या सॉल्वर गैंग की मदद लेते पकड़ा जाता है, तो उस पर परीक्षा एजेंसी (जैसे NTA या UPSC) के अपने प्रशासनिक नियम (जैसे 3 साल का बैन या परीक्षा से डिबार करना) ही लागू रहेंगे. यह कानून केवल माफिया, सॉल्वर गैंग, भ्रष्ट अफसरों और धांधली कराने वाली टेक-कंपनियों को जेल भेजने के लिए बना है.
जांच का तरीका क्या होगा? कौन करेगा कार्रवाई?
मामले की गंभीरता को देखते हुए इस कानून में जांच प्रणाली को भी हाई-टेक और पावरफुल बनाया गया है. इस कानून के तहत मामलों की जांच डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) या असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) स्तर के वरिष्ठ अधिकारी ही करेंगे. केंद्र सरकार के पास यह अधिकार होगा कि वह किसी भी बड़े मामले की जांच सीधे CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को सौंप सके.
Advertisement
यह अपराध पूर्ण रूप से संज्ञेय (Cognizable), गैर-जमानती (Non-Bailable) और गैर-शमनीय (Non-Compoundable) होगा. यानी पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकेगी और कोर्ट से आसानी से जमानत नहीं मिलेगी.
छात्रों की तैयारी और भविष्य पर क्या पड़ेगा असर?
समय पर होंगे रिजल्ट: पेपर लीक रुकने से परीक्षाएं बार-बार रद्द नहीं होंगी और भर्ती प्रक्रियाएं सालों-साल नहीं लटकेंगी.
हाई-टेक सिक्योरिटी का सामना: परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को पहले से ज्यादा सख्त मेटल डिटैक्टर, बायोमेट्रिक और एआई-बेस्ड मॉनिटरिंग से गुजरना पड़ सकता है.
एग्जाम पैटर्न में बदलाव नहीं: सिलेबस, टाइमिंग और परीक्षा पैटर्न बिल्कुल वही रहेगा, इसलिए छात्रों को अपनी तैयारी का तरीका बदलने की कोई जरूरत नहीं है.
यह कानून सालों से मेहनत कर रहे देश के करोड़ों ईमानदार छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी ढाल बनकर आया है. कागजों पर यह कानून बेहद मजबूत और असरदार दिखता है, अब देखना यह होगा कि जमीनी स्तर पर इसका पालन कितनी सख्ती से कराया जाता है ताकि 'तारीख पर तारीख' और 'रद्द होती परीक्षाओं' का दौर हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो सके!
---- समाप्त ----
TOPICS:
Latest News in Hindi »
Advertisement
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
शेख हसीना की वापसी पर गिरफ्तारी तय, बांग्लादेश के कानून मंत्री का बड़ा बयान

दिल्ली कोर्ट ने आइशी घोष के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट रद्द किया

अकाल तख्त का पंजाब सरकार को अल्टीमेटम, बेअदबी कानून पर आम सहमति तक विधानसभा में न हो चर्चा

दिल्ली की अदालत ने साइबर ठगी के आरोपी को दुबई यात्रा की मंजूरी दी

एंटी पेपर लीक कानून: जानें कैसे बदल जाएगा एग्जाम सिस्टम और छात्रों पर क्या होगा असर

सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दंगा मामले में जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट में सेंथिल बालाजी की याचिका पर सुनवाई, क्या मिलेगी गिरफ्तारी से पहले जमानत?

सुप्रीम कोर्ट ने भगवंत मान समेत AAP नेताओं को नोटिस भेजा, चुनाव प्रचार में थे इन दंगों के दोषी
ताज़ा ख़बरें
- Madras उच्च न्यायालय ने डीवीएसी भ्रष्टाचार मामले में पूर्व द्रमुक मंत्री सेंथिल बालाजी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया
- टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को विदेश जाने की अनुमति न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका
- अकाल तख्त ने पंजाब सरकार के जवाब को खारिज किया, बेअदबी कानून पर एक्सपर्ट कमेटी बनाई
- सुप्रीम कोर्ट ने दी केंद्र सरकार को गैर-अनुपालक परियोजनाओं के लिए माफी योजनाएं तैयार करने की शक्ति
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला: असाधारण हालात में पैलेट गन का उपयोग संभव
- सुप्रीम कोर्ट ने माना कि केंद्र सरकार गैर-अनुपालक परियोजनाओं के लिए समयबद्ध माफी योजनाएं बना सकती है
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला: मनमोहन सिंह को कोयला आवंटन मामले में बरी करने का आदेश
- शिवसेना के नाम-सिंबल विवाद पर सुनवाई: 'एक नेता पूरी पार्टी नहीं'

