होमकानूनअकाल तख्त को बेअदबी कानून के संशोधित मसौदे से असंतोष, जत्थेदार ने 90% सुझावों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया
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अकाल तख्त को बेअदबी कानून के संशोधित मसौदे से असंतोष, जत्थेदार ने 90% सुझावों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा भेजे गए बेअदबी कानून के संशोधित मसौदे में पंथ की ओर से दिए गए 90% सुझावों को शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि जब तक संशोधनों पर अंतिम सहमति नहीं बन जाती, तब तक पंजाब विधानसभा सत्र में इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए.

30 जुलाई 2026 को 08:33 am बजे
अकाल तख्त को बेअदबी कानून के संशोधित मसौदे से असंतोष, जत्थेदार ने 90% सुझावों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया

सौजन्य से:- amarujala.com

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Amritsar: बेअदबी कानून के संशोधित मसौदे पर अकाल तख्त असंतुष्ट, जत्थेदार बोले-90 फीसदी सुझाव नहीं माने गए

Thu, 30 Jul 2026 01:03 PM IST

Nivedita

संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर

संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर

Published by: Nivedita

Updated Thu, 30 Jul 2026 01:03 PM IST

सार

ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि जब तक बेअदबी कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर अंतिम सहमति नहीं बन जाती, तब तक 3 अगस्त से शुरू होने वाले पंजाब विधानसभा सत्र में इस कानून पर किसी प्रकार की चर्चा या विधायी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।

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विस्तार

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने पंजाब सरकार की ओर से भेजे गए बेअदबी कानून के संशोधित मसौदे पर असंतोष जताया है।

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उन्होंने कहा कि सरकार ने पंथ की ओर से दिए गए अधिकतर सुझावों को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जिन प्रमुख बिंदुओं पर पहले सहमति बनी थी, उनमें से करीब 90 प्रतिशत सुझावों को संशोधित मसौदे में शामिल नहीं किया गया।

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जत्थेदार ने बताया कि पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में कानून के कई प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। बैठक में विशेष रूप से "कस्टोडियन" शब्द को हटाने, "स्वरूप" की जगह "बीड़" शब्द शामिल करने तथा बेअदबी के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालतों का प्रावधान करने पर सहमति बनी थी। इन संशोधनों का उद्देश्य बेअदबी के मामलों में शीघ्र सुनवाई और दोषियों को जल्द सजा सुनिश्चित करना था।

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बैठक के बाद पंजाब सरकार से इन बिंदुओं को शामिल करते हुए संशोधित मसौदा भेजने को कहा गया था। उन्होंने कहा कि सरकार को 28 जुलाई तक संशोधित मसौदा भेजने का समय दिया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि तक कोई दस्तावेज प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद 29 जुलाई को सरकार ने संशोधित मसौदा भेजा। जब मसौदे का अध्ययन किया गया तो पाया गया कि जिन प्रमुख आपत्तियों को दूर करने का आश्वासन दिया गया था, उनमें अपेक्षित संशोधन नहीं किए गए।

जत्थेदार ने कहा कि "स्वरूप" की जगह "बीड़" शब्द जोड़ने और "कस्टोडियन" शब्द हटाने की मांग पर सरकार ने यह कहते हुए बदलाव नहीं किया कि यह उसके अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। सरकार ने "कस्टोडियन" शब्द की केवल विस्तृत व्याख्या जोड़ दी, लेकिन उसे मसौदे से हटाया नहीं गया। इसी तरह "स्वरूप" शब्द भी पहले की तरह बरकरार रखा गया।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से दी गई लंबी व्याख्या की आवश्यकता नहीं थी, बल्कि जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन्हें कानून में शामिल किया जाना चाहिए था। ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने कहा कि जब तक बेअदबी कानून में प्रस्तावित संशोधनों पर अंतिम सहमति नहीं बन जाती, तब तक 3 अगस्त से शुरू होने वाले पंजाब विधानसभा सत्र में इस कानून पर किसी प्रकार की चर्चा या विधायी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।

उनका कहना था कि पहले श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा उठाई गई आपत्तियों और दिए गए सुझावों पर सहमति बनना जरूरी है, उसके बाद ही कानून को विधानसभा में लाया जाना चाहिए।

प्रेस वार्ता में जत्थेदार ने दोहराया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की मर्यादा और सम्मान से जुड़े विषय पर किसी भी कानून को अंतिम रूप देने से पहले पंथ की भावनाओं, धार्मिक परंपराओं और अकाल तख्त साहिब के सुझावों का सम्मान किया जाना आवश्यक है। उनका कहना था कि यदि सहमति से तय किए गए बिंदुओं को कानून में शामिल नहीं किया जाता, तो इसका उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

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