अकाल तख्त की ओर से पंजाब सरकार से बेअदबी कानून पर अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई।
अकाल तख्त की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति ने पंजाब सरकार को बेअदबी कानून पर अपनी आपत्तियों पर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है। समिति ने सरकार के जवाब को मूल आपत्तियों का समाधान करने वाला नहीं माना है।

सौजन्य से:- Jagran
बेअदबी कानून पर बढ़ा टकराव, अकाल तख्त की समिति ने पंजाब सरकार से मांगा अनुपालन; पंथक सहमति के बिना चर्चा नहीं
बेअदबी कानून पर अकाल तख्त की विशेषज्ञ समिति ने पंजाब सरकार से पहले आपत्तियों पर अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। समिति ने सरकार के जवाब को मूल मुद्दों से भटक ...और पढ़ें
HighLights
- बेअदबी कानून पर पंजाब सरकार-अकाल तख्त में विवाद।
- अकाल तख्त विशेषज्ञ समिति ने अनुपालन रिपोर्ट मांगी।
- सिख धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप पर जताई आपत्ति।
डिजिटल टीम, अमृतसर। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी रोकने के लिए प्रस्तावित कानून को लेकर पंजाब सरकार और अकाल तख्त के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अकाल तख्त की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि कानून को लेकर आगे किसी तरह की चर्चा से पहले पंजाब सरकार को अकाल तख्त की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
समिति ने सरकार की ओर से 29 जुलाई को दिए गए जवाब को मूल आपत्तियों का समाधान करने वाला नहीं माना है। अकाल तख्त की ओर से इस मामले पर सरकार के साथ विचार-विमर्श के लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी। समिति की पहली बैठक गुरुवार को हुई।
बैठक में सरकार की ओर से दिए गए जवाब और अकाल तख्त की आपत्तियों पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति ने विशेष रूप से उन प्रावधानों पर सवाल उठाए, जिनसे सिख धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप की आशंका जताई गई है।
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सरकार के जवाब मुद्दे से भटकाने वाला
अकाल तख्त सचिवालय की ओर से शुक्रवार को जारी बयान में कहा गया कि एक महीने की समय सीमा समाप्त होने से ठीक एक दिन पहले पंजाब सरकार की ओर से दिया गया जवाब तथ्यों को स्पष्ट करने के बजाय मुद्दे को दूसरी दिशा में ले जाने वाला है। सचिवालय के अनुसार, खालसा पंथ की चिंताओं से पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष और मंत्रिमंडल के सदस्यों को 31 जुलाई को स्पष्ट रूप से अवगत कराया जा चुका है।
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सचिवालय ने कहा कि बेअदबी जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दे का समाधान निकालने के लिए सरकार का अब तक का रवैया रचनात्मक नहीं रहा है। अकाल तख्त की ओर से पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद पंजाब सरकार ने इस विषय पर विचार करने के लिए अपनी समिति का गठन अभी तक नहीं किया है।
29 जुलाई के जवाब पर उठे सवाल
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज्ज ने 29 जुलाई को पंजाब सरकार की ओर से भेजे गए जवाब को असंतोषजनक बताया था। इसके बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार के साथ बातचीत के लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की घोषणा की थी।
समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश रूपिंदर सिंह सोढ़ी, सेवानिवृत्त न्यायाधीश मोहिंदर मोहन सिंह बेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता पूरन सिंह हुंदल, सिख विद्वान डॉ. केहर सिंह और प्रोफेसर जगमोहन सिंह को शामिल किया गया है। समिति को सरकार के साथ कानून से जुड़े विवादित और धार्मिक पहलुओं पर विचार-विमर्श करने की जिम्मेदारी दी गई है।
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पंथक सहमति के बिना कानून पर चर्चा नहीं
अकाल तख्त के जत्थेदार ने इससे पहले पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह और सिख विधायकों तथा मंत्रियों को अलग-अलग पत्र भेजे थे। इनमें स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि पंथक सहमति के बिना बेअदबी कानून पर आगे चर्चा या संशोधन नहीं किया जाना चाहिए।
जत्थेदार ने सभी सिख विधायकों और मंत्रिमंडल के सिख सदस्यों से कहा था कि तीन अगस्त से शुरू हुए विधानसभा सत्र के दौरान अकाल तख्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के साथ सहमति बनने तक इस कानून पर किसी तरह की चर्चा न की जाए। साथ ही किसी नए संशोधन को मंजूरी नहीं देने के लिए भी कहा गया था।
सरकार ने भेजा था आपत्तियों पर जवाब
यह पूरा विवाद उस समय और बढ़ गया जब आम आदमी पार्टी के विधायक इंदरबीर सिंह निज्जर ने अकाल तख्त की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर पंजाब सरकार का जवाब सौंपा। सरकार के इस जवाब के बाद जत्थेदार ने इसे संतोषजनक नहीं माना और विशेषज्ञ समिति गठित करने का फैसला किया।
अब विशेषज्ञ समिति ने साफ कर दिया है कि आगे की बातचीत से पहले सरकार को अकाल तख्त की आपत्तियों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी। खासकर सिख धार्मिक मामलों में किसी तरह के हस्तक्षेप से जुड़े प्रावधानों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना होगा।
(इनपुट- पीटीआई)
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