एटा के विशेष न्यायालय ने नाबालिग पर बलात्कार करने वाले आरोपी को 20 साल की कठोर कारावास की सजा दी
अगस्त 2021 के गंभीर मामले में आरोपी अजय को किशोरी का अपहरण कर बलात्कार करने के आरोप सिद्ध हुए। विशेष न्यायाधीश सारिका गोयल ने सबूतों और गवाहियों के आधार पर 20 वर्ष की कठोर जेल और 80,000 रुपये का आर्थिक दंड दिया। इस फैसले से पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिला।

सौजन्य से:- ETV Bharat
एटा: नाबालिग से दुष्कर्म मामले में अदालत का फैसला, दोषी को 20 साल की कठोर कारावास की सजा
कोर्ट ने किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में दोषी अजय को 20 साल कठोर कारावास और 80 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.
By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : September 18, 2026 at 10:32 PM IST
एटा: एटा जिले की एक विशेष अदालत ने नाबालिग किशोरी का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने के गंभीर मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. न्यायालय ने मामले की गंभीरता, गवाहों के बयानों और पुख्ता सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर 80 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. अर्थदंड न चुकाने पर दोषी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी.
विशेष न्यायाधीश सारिका गोयल की कोर्ट ने दी सजा: विशेष न्यायाधीश सारिका गोयल की अदालत ने यह फैसला सुनाया है. यह पूरा मामला अगस्त 2021 का है. अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी अजय पुत्र विजेंद्र कुमार बुलंदशहर जिले के थाना अगौता के गांव मालागढ़ का निवासी है. उसने एटा में नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर उसका अपहरण कर लिया था.
पुलिस ने तफ्तीश पूरी कर कोर्ट में दाखिल की थी चार्जशीट: आरोपी पीड़िता को अपने साथ ले गया और उसके साथ जबरन दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया. पीड़ित परिवार की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी अजय के खिलाफ संबंधित धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी. मामले की तफ्तीश करते हुए जांच अधिकारी ने तत्परता से सबूत जुटाए और आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की. विशेष अदालत में इस संवेदनशील मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली.
ठोस गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों से साबित हुआ जुर्म: सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं ने पीड़िता का पक्ष मजबूती से रखा और अदालत के सामने ठोस गवाह व वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए. दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस और दलीलों को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश सारिका गोयल ने माना कि आरोपी के खिलाफ अपराध पूरी तरह साबित होता है. अदालत ने आरोपी अजय को दोषी पाते हुए उसे 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. इस सख्त फैसले से पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिला है.
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