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सुपौल लोक अदालत 12 सितंबर को: 3200 मामले, 2800 को नोटिस

12 सितंबर को सुपौल में लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, 3200 मामलों पर सुलह की तैयारी, 2800 को नोटिस बैठक करते सचिव | Prabhat Khabar Network सुपौल में 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हो रहा है. जिला विधिक सेवा प…

21 अगस्त 2026 को 10:55 am बजे
सुपौल लोक अदालत 12 सितंबर को: 3200 मामले, 2800 को नोटिस

सौजन्य से:- Prabhat Khabar

12 सितंबर को सुपौल में लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, 3200 मामलों पर सुलह की तैयारी, 2800 को नोटिस

बैठक करते सचिव | Prabhat Khabar Network

सुपौल में 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हो रहा है. जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने 3200 से अधिक सुलहनीय मामलों को चिह्नित किया है, जिनमें से 2800 से अधिक पक्षकारों को नोटिस भेजा जा चुका है. इसका उद्देश्य आपसी सहमति से विवादों का त्वरित और सरल समाधान प्रदान करना है.

Supaul National Lok Adalat 2026: सुपौल. अगर किसी विवाद को वर्षों तक अदालत में चलाने के बजाय आपसी सहमति से जल्द सुलझाने का मौका मिले, तो पक्षकारों के लिए इससे बड़ी राहत क्या हो सकती है. सुपौल में आगामी 12 सितंबर 2026 को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने इसी दिशा में अपनी तैयारी तेज कर दी है.

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अब तक करीब 3200 सुलहनीय एवं निष्पादन योग्य मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए चिह्नित किया जा चुका है. इनमें से 2800 से अधिक मामलों में पक्षकारों को नोटिस की तामिला भी करायी जा चुकी है. शेष मामलों में नोटिस पहुंचाने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया गया है.

बैठक में तय हुई रणनीति, हर पात्र मामले तक पहुंचने पर जोर

राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों को लेकर गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के तत्वावधान में महत्वपूर्ण बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता प्राधिकार के सचिव मो. अफजल आलम ने की.

बैठक में सिविल कोर्ट के कार्यालय सहायक और पैरा लीगल वॉलंटियर्स यानी पीएलवी शामिल हुए. बैठक का मुख्य फोकस अधिक से अधिक ऐसे मामलों की पहचान और सुनवाई सुनिश्चित करना रहा, जिनका समाधान पक्षकारों की आपसी सहमति और सुलह-समझौते से किया जा सकता है.

400 से अधिक मामलों में अभी नोटिस की प्रक्रिया बाकी

अब तक करीब 3200 मामलों को चिह्नित किया गया है. इनमें 2800 से अधिक मामलों के पक्षकारों तक नोटिस पहुंच चुका है. ऐसे में शेष मामलों में भी समय पर नोटिस की तामिला सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है.

सचिव मो. अफजल आलम ने कार्यालय सहायकों और पीएलवी को निर्देश दिया कि जिन मामलों में अभी नोटिस नहीं पहुंचा है, वहां प्रक्रिया में तेजी लायी जाए. संबंधित पक्षकारों को समय रहते राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि वे निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर अपने विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ सकें.

समझौते की संभावना वाले मामलों को मिलेगी प्राथमिकता

बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि ऐसे मामलों को प्राथमिकता से चिह्नित किया जाए, जिनमें दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना है.

राष्ट्रीय लोक अदालत का मूल उद्देश्य ही आपसी सहमति के आधार पर विवादों का त्वरित और सरल समाधान कराना है. इसलिए संबंधित पक्षकारों को लोक अदालत में उपस्थित होने के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया.

इस प्रक्रिया में कार्यालय सहायकों और पीएलवी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. दोनों पक्षों के बीच संवाद और समझौते की संभावनाओं को आगे बढ़ाने में पीएलवी मदद करेंगे.

गांव-गांव पहुंचेंगे पीएलवी, लोगों को बताएंगे लोक अदालत के फायदे

राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी केवल अदालत परिसर तक सीमित नहीं रखने की योजना है. बैठक में पीएलवी को ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में जाकर लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया.

पीएलवी लोगों को बताएंगे कि आपसी सहमति से विवादों का समाधान कराने के लिए लोक अदालत एक सरल और प्रभावी माध्यम है. जिन लोगों के मामले सुलह के योग्य हैं, उन्हें राष्ट्रीय लोक अदालत में उपलब्ध विकल्पों की जानकारी दी जायेगी.

खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग कानूनी प्रक्रिया की जटिलताओं और खर्च के कारण अपने मामलों को लेकर लंबे समय तक परेशान रहते हैं. ऐसे में लोक अदालत के बारे में सही जानकारी उनके लिए उपयोगी साबित हो सकती है.

Supaul National Lok Adalat 2026: समय और पैसे की बचत, सौहार्दपूर्ण समाधान पर जोर

सचिव मो. अफजल आलम ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से मामलों का समाधान होने पर पक्षकारों के समय और धन दोनों की बचत होती है. साथ ही आपसी सहमति के आधार पर विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान भी संभव होता है.

उन्होंने सभी संबंधित कर्मियों और पीएलवी से आपसी समन्वय के साथ पूरी तत्परता से काम करने का आह्वान किया, ताकि 12 सितंबर को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को अधिक प्रभावी बनाया जा सके.

अब जिला विधिक सेवा प्राधिकार की नजर शेष मामलों में नोटिस की तामिला और पक्षकारों को जागरूक करने की प्रक्रिया पर है. 3200 चिह्नित मामलों में से कितने विवाद आपसी सहमति से सुलझते हैं, इसका असर राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता पर भी दिखाई देगा.

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लेखक के बारे में

By राजीव कुमार झा

राजीव कुमार झा प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 02 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत हिन्दुस्तान से की. अभी प्रभात खबर ब्यूरोचीफ के पद पर सुपौल में काम कर रहे हैं. शिक्षा, कला-संस्कृति, सामाजिक कार्य व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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