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सुप्रीम कोर्ट ने स्रीदेवी की चेंनाई संपत्ति पर स्थिति बनाये रखी, बोनी कपूर व बेटीजन को नोटिस

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सुप्रीम कोर्ट ने स्रीदेवी की चेंनाई संपत्ति पर स्थिति बनाये रखी, बोनी कपूर व बेटीजन को नोटिस
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर को बोनी कपूर, जन्हवी और कुशी कपूर को स्रीदेवी की ईस्ट कोस्ट रोड की 4.7 एकड़ संपत्ति से जुड़े प्रतिस्पर्धी दावे पर नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई तक स्थिति बनाये रखने का आदेश दिया। यह कार्रवाई एम.सी. शिवाकामी एवं एम.सी. नटराजन द्वारा दायर याचिका के बाद हुई, जिसमें वे चार बिक्री दस्तावेज़ को धोखाधड़ी बताकर संपत्ति पर अपना अधिकार सिद्ध करना चाहते हैं। अदालत ने हाई कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखते हुए आगे की सुनवाई तय की।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।

मुकदमे

फोर्टिस ने फोरेंसिक ऑडिट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

फोर्टिस ने फोरेंसिक ऑडिट आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड ने दाइची सैंक्यो केस में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त फोरेंसिक ऑडिटर के आदेश को चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की है। हाईकोर्ट ने 3,500 करोड़ रुपये के मध्यस्थता निर्णय के तहत शेयर लेनदेन की जाँच के लिए एस. रामानंद अय्यर एंड कंपनी को छह माह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। यह याचिका मलविंदर मोहन सिंह एवं शिविंदर मोहन सिंह से जुड़े पूर्व प्रवर्तकों के मामले से जुड़ी है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

वकील

सुप्रीम कोर्ट में 2,000 रुपये से अधिक यूपीआई लेन‑देन पर शुल्क को चुनौती

वकील अंजन दत्ता ने केंद्र सरकार, RBI, NPCI और यूपीआई स्टियरींग कमेटी के खिलाफ नई मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू करने की नोटिफ़िकेशन को रद्द करने की याचिका दायर की। यह याचिका इस बात पर जड़ देती है कि 2,000 रुपये से ऊपर के वाणिज्यिक यूपीआई लेन‑देन पर 0.4% शुल्क अंततः ग्राहकों पर बोझ बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया है।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

संविधान

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में प्रोबेशन वेतन 100% के आदेश को चुनौती, कहती है नियम बनाने का अधिकार हमारा

मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें सीधे भर्ती किए गए कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में 100% वेतन देने का निर्देश दिया गया था। सरकार का तर्क है कि यह कदम राज्य के बजट पर अतिरिक्त बोझ डालेगा और संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत सेवा शर्तें निर्धारित करने का अधिकार सरकार का है। हाईकोर्ट ने पहले 70‑80‑90% वेतन नियम को रद्द कर नियुक्ति के दिन से पूर्ण वेतन देने का आदेश दिया था।

कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।

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