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अपराध

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फ़ैसले: आवारा कुत्तों से लेकर औद्योगिक पट्टे रद्दीकरण तक

SCC Online के अनुसार · 24x7 NYAYA
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फ़ैसले: आवारा कुत्तों से लेकर औद्योगिक पट्टे रद्दीकरण तक
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

सुप्रीम कोर्ट के सेक्शन 7(भाग‑2) में आवारा कुत्तों के खतरे, आरक्षित आदेशों की घोषणा में देरी और पट्टे पर दी गई औद्योगिक भूखंड की रद्दीकरण जैसी प्रमुख विषयों पर कई मील‑पत्थर निर्णय सम्मिलित हैं। इन मामलों में संविधान धारा 21, 32 और 142 के तहत निर्देशों की पूर्ति, बाल शिक्षा के अनिवार्य प्रारंभिक चरण, और पुलिस गिरफ्तारी एवं नज़रबंदी आदेशों के नियमन के लिये विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

फैसले

ओडिशा जन कांग्रेस ने एमएमडीआर कानून के विरोध में चंडीखोल में बड़ा प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी का आह्वान

ओडिशा जन कांग्रेस ने एमएमडीआर कानून के विरोध में चंडीखोल में बड़ा प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी का आह्वान

ओडिशा जन कांग्रेस ने बताया कि संसद में हाल ही में पारित एमएमडीआर कानून राज्य के आर्थिक अधिकारों पर प्रतिकूल असर डालेगा, विशेष रूप से धारा 9‑डी के तहत पुराने बकाए की वसूली और खनिज संसाधनों पर कर व रॉयल्टी संग्रह का अधिकार प्रभावित होगा। इस कारण संगठन ने 8 सितंबर को जाजपुर जिले के चंडीखोल में विशाल विरोध प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी करने का निर्णय लिया और लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने का आग्रह किया।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

अपराध

उच्च न्यायालयों के विविध आदेशों का संक्षिप्त सार

इलेक्ट्रॉनिक वोटर आईडी सत्यापन से लेकर बीमा प्रीमियम, वैवाहिक आयु सीमा में IVF विकल्प, दत्तक में जैविक पिता की अनुमति, वरिष्ठ नागरिक अधिकारों और लैंगिक अपराधों तक विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय उच्च न्यायालयों ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन आदेशों में मेडिकल सीट खाली करने वाले उम्मीदवार को प्रवेश प्रक्रिया से बाहर करना, बूथ लेवल एजेंट की सीमित जिम्मेदारी, रद्दीकरण सूचना न देने पर बीमा दावों का निपटारा, वैवाहिक जोड़ों के लिए आयु सीमा के भीतर IVF चयन, और बच्चों के लिंग को चूमने को तीव्र यौन हमले के रूप में मानना शामिल है। इन रुखों ने सामाजिक एवं कानूनी मानदंडों को स्पष्ट करने में योगदान दिया है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।

कानून

देरिया में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, विवादों का निपटारा आसान

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार देरिया में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह मंच आपसी सहमति और सुलह-समझौते से निपटाए जा सकने वाले मामलों के लिए है, जबकि गैर-समझौतावादी आपराधिक मामलों का निस्तारण इसमें नहीं किया जाता।

अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

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