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मुकदमे

सुप्रीम कोर्ट ने सीएपीएफ में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के कार्यान्वयन पर सरकार से स्पष्टता मांगी

The Hindu के अनुसार · 24x7 NYAYA
सुप्रीम कोर्ट ने सीएपीएफ में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के कार्यान्वयन पर सरकार से स्पष्टता मांगी
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

सुप्रीम कोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन से 2025 के उस निर्णय के कार्यान्वयन पर स्पष्टीकरण मांगा, जिसमें सीएपीएफ के वरिष्ठ पदों पर आईपीएस अधिकारियों की नियुक्तियों को धीरे‑धीरे कम करने का निर्देश था। न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने बताया कि ‘मजबूत लॉबी’ के कारण कैडर अधिकारियों को दबा दिया गया है, जबकि 46 आईपीएस अधिकारियों को अभी भी SAG स्तर तक प्रतिनियुक्ति मिली है। सरकार ने कैडर समीक्षा शुरू कर 28 अक्टूबर 2025 के बाद विस्तृत प्रस्ताव भेजे हैं, जिनकी समीक्षा 22 सितंबर को फिर से सुनवाई के दौरान होगी।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

अपराध

राष्ट्रपति न्यायालय में जवाबदेही की चुनौती: राजस्थान हाईकोर्ट विवाद और कॉलेजियम की जटिलताएँ

राष्ट्रपति न्यायालय में जवाबदेही की चुनौती: राजस्थान हाईकोर्ट विवाद और कॉलेजियम की जटिलताएँ

एक सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश ने राजस्थान उच्च न्यायालय में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक शक्ति के दुरुपयोग का आरोप लगाया, जिससे न्यायिक जवाबदेही और कॉलेजियम प्रणाली की कार्यप्रणाली पर तीव्र चर्चा हुई। लेख में संवैधानिक धाराओं, आंतरिक जांच तंत्र, कार्यवाहक प्रमुख के प्रभाव और न्यायिक स्थानांतरण के प्रयोग को संस्थागत अखंडता के संदर्भ में विश्लेषित किया गया है।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

वकील

अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय बने राम मंदिर ट्रस्ट के नए ट्रस्टी, कानूनी जंग के अनुभवी

अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय, जिन्होंने रामलला के पक्ष में कई महत्त्वपूर्ण मामलों में अदालत में पैरवी की, को 2 सितंबर की बैठक में श्रीयाम राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया। अब वे महेश भागचंदका और डॉ. निर्मला यादव के साथ ट्रस्ट के निर्णय‑निर्धारण प्रक्रिया में योगदान देंगे।

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

कानून

चीन के राष्ट्रीय रक्षा कानून में संशोधन: भारत-चीन सीमा पर संभावित प्रभाव

चीन ने राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून में बदलाव करके सरकार को आम नागरिकों, उद्योगों और तकनीकी संसाधनों पर व्यापक अधिकार दिए हैं। यह परिवर्तन 1 अक्टूबर से लागू होगा और डेटा, एआई एवं साइबर सिस्टम सहित कई क्षेत्रों को रक्षा हेतु जुटा सकेगा। इससे भारत-चीन सीमा पर तनाव के दौरान चीन की तेज़ तैनाती क्षमता बढ़ सकती है, जबकि भारत को अपनी रक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करना पड़ेगा।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

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