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कानून

चिराग पासवान ने स्वीकारी बिहार में शराबबंदी कानून की विफलता!

Navbharat Times के अनुसार · 24x7 NYAYA
चिराग पासवान ने स्वीकारी बिहार में शराबबंदी कानून की विफलता!
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

चिराग पासवान ने शराबबंदी कानून मौजूदा स्वरूप में अपने उद्देश्य को हासिल करने में विफल होने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इसकी समीक्षा किए जाने की भी जरूरत है।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की राहत: कॉमेडियन्स को विकलांगों पर टिप्पणी मामले में मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट की राहत: कॉमेडियन्स को विकलांगों पर टिप्पणी मामले में मिली राहत

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना सहित पांच कॉमेडियन्स को विकलांगों पर की गई टिप्पणी के मामले में राहत प्रदान की है। यह मामला उनके द्वारा की गई एक विवादास्पद टिप्पणी से जुड़ा है।

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

संविधान

संविधान पर व्यापक पाठ्यक्रम की शुरुआत

भारतीय संविधान पर व्यवस्थित ज्ञान प्राप्त करने के लिए लाइव लॉ अकादमी ने एक विज़ुअल कोर्स शुरू ही कर दिया है, जिसमें सलाहकार द्वारा पढ़ाई जा रही है।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

अपराध

बीसीआई द्वारा छात्रों के खिलाफ हस्तक्षेप पर सीजेआई की आलोचना

सीजेआई सूर्य कांत ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने उनके और छात्रों के बीच चल रहे 'संवाद' में अनुचित हस्तक्षेप किया है। न्यायालय ने कहा कि बीसीआई का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है छात्रों के आचरण को विनियमित करने और नALSAR के छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

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