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अपराध

बांग्लादेश की अदालत ने हिंदू भिक्षु को जमानत दी, लेकिन रिहाई की संभावना नहीं

India Today के अनुसार · 24x7 NYAYA
बांग्लादेश की अदालत ने हिंदू भिक्षु को जमानत दी, लेकिन रिहाई की संभावना नहीं
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

बांग्लादेश के उच्च न्यायालय ने रविवार को हिंदू भिक्षु चिन्मय कृष्ण दास को दो आपराधिक मामलों में जमानत दे दी, लेकिन उन पर देशद्रोह और हत्या सहित चार अन्य लंबित मामले अभी भी चल रहे हैं। इस आदेश से उनकी तत्काल रिहाई की संभावना नहीं है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।

कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

अपराध

बांग्लादेश हाईकोर्ट ने हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास को जमानत दी, किन्तु तत्काल रिहाई की गारंटी नहीं

बांग्लादेश हाईकोर्ट ने हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास को जमानत दी, किन्तु तत्काल रिहाई की गारंटी नहीं

बांग्लादेश हाईकोर्ट ने हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास को दो मामलों में जमानत दी है, लेकिन उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित नहीं है, क्योंकि उन पर चार अन्य मामलों में भी आरोप हैं।

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

फैसले

विकास के लिए कानून बनाने का मार्ग प्रशस्त करना

16वीं राष्ट्रीय सभा के पहले असाधारण सत्र से पहले राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष ट्रान थान मान ने प्रमुख मुद्दों पर चर्चा के लिए एक बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सभा को विकास के लिए कानून बनाने और गुणवत्ता से समझौता किए बिना नवाचार करने की आवश्यकता है।

अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

अपराध

सुस्त पड़ा छात्रों का आंदोलन, सुप्रीम कोर्ट में आज फिर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में संसद मार्च के दौरान पुलिस पर हुई बर्बरता के मामले में आज फिर सुनवाई होगी। कोर्ट प्रदर्शनकारियों और पैलेट गन से घायलों के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक एसआईटी बना सकती है।

अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।

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