जंगल की आग पर उच्च न्यायालय के 2016 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया, नए निर्देशों के लिए भेजा

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के 2016 के फैसले को रद्द कर दिया, जिसने जंगल की आग की लगातार घटनाओं और पारिस्थितिकी, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को होने वाली तबाही का न्यायिक नोटिस लिया था।
कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।
पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।
अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया।
