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न्याय ही सत्य है
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लॉ स्कूल

डिगिटल युग में न्याय: पारुल विश्वविद्यालय का लॉ कॉन्क्लेव 2026 तकनीकी परिवर्तन के माध्यम से न्याय प्रणाली पर चर्चा करता है

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डिगिटल युग में न्याय: पारुल विश्वविद्यालय का लॉ कॉन्क्लेव 2026 तकनीकी परिवर्तन के माध्यम से न्याय प्रणाली पर चर्चा करता है
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

पारुल विश्वविद्यालय का लॉ कॉन्क्लेव 2026 डिजिटल युग में न्यायिक प्रणाली के भविष्य पर चर्चा करने के लिए न्यायपालिका के सदस्यों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों को एक साथ लाता है।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

मुकदमे

दिल्ली जिमखाना के प्रति केंद्र के नोटिस पर उच्च न्यायालय का रुख

दिल्ली जिमखाना के प्रति केंद्र के नोटिस पर उच्च न्यायालय का रुख

दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों ने केंद्र सरकार के निष्कासन नोटिस को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। अपनी जमीन पुनः प्राप्त करने और सदस्यता के अधिकारों की रक्षा के लिए क्लब ने उच्च न्यायालय का रुख किया है।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

मुकदमे

मृत महिला के 5 वारिसों को अदालत में पक्षकार बनाने का आदेश, अब वे मुआवजा समझौता करा सकेंगे

नाहन में अदालत ने भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामले में दिवंगत सुमोती देवी के कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाया है। वे अब मुआवजा संबंधी कार्यवाही को आगे बढ़ा सकेंगे।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

मुकदमे

चेक बाउंस मामले में दोषी की सजा पर रोक

अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने चेक बाउंस के एक मामले में दोषी को राहत देते हुए निचली अदालत की दी सजा पर रोक लगाई है।

मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा। आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके।

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