किशोर मामले रोजगार में बाधा नहीं डाल सकते, लंबित अंतिम रिपोर्ट पर सेवाऐं से वंचित नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बताया कि केवल इसलिए सार्वजनिक रोजगार से वंचित नहीं किया जा सकता है कि कोई व्यक्ति किशोरावस्था के दौरान किए गए अपराधों से संबंधित आपराधिक कार्यवाही में लंबित है। कोर्ट ने कहा कि लंबितता के आधार पर नियुक्ति को अटकाना ठीक नहीं है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।
कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।
पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

