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अपराध

13 दिनों तक पत्नी से बात न करने की बात पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा क्रूरता नहीं, बरी किया पति

Navbharat Times के अनुसार · 24x7 NYAYA
13 दिनों तक पत्नी से बात न करने की बात पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा क्रूरता नहीं, बरी किया पति
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जीवनसाथी से कुछ दिनों तक बातचीत न करना क्रूरता नहीं माना जा सकता, हालांकि पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष गंभीर दुर्व्यवहार साबित करने में नाकाम रहा और इस बात पर जोर दिया कि वैवाहिक मतभेद और कभी-कभार की चुप्पी सामान्य बात है।

आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

वकील

भारतीय न्यायपालिका: मध्यस्थता को एक मजबूत विवाद समाधान तंत्र के रूप में बढ़ावा

भारतीय न्यायपालिका: मध्यस्थता को एक मजबूत विवाद समाधान तंत्र के रूप में बढ़ावा

भारतीय न्यायपालिका ने मध्यस्थता को एक मजबूत विवाद समाधान तंत्र के रूप में बढ़ावा देने के लिए काम किया है, जिससे गति और सामर्थ्य प्रदान की जाती है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मध्यस्थता उनके दिल के बहुत करीब है और भारत में हर कस्बे, हर गली में लोग जानते हैं कि मध्यस्थता क्या है।

कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।

सुप्रीम कोर्ट

2026 लाइवलॉ (एससी) 621 | आयुक्त, ब्रुहत बैंगलोर महानगर पालिका बनाम के.के. उमेश कुमार एवं अन्य

खड़े वाहन पर पेड़ गिरने से लगी चोट 'मोटर दुर्घटना' नहीं; एमएसीटी दावा दायर नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।

फैसले

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याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।

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