13 दिनों तक पत्नी से बात न करने की बात पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा क्रूरता नहीं, बरी किया पति

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जीवनसाथी से कुछ दिनों तक बातचीत न करना क्रूरता नहीं माना जा सकता, हालांकि पत्नी ने आत्महत्या कर ली थी। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष गंभीर दुर्व्यवहार साबित करने में नाकाम रहा और इस बात पर जोर दिया कि वैवाहिक मतभेद और कभी-कभार की चुप्पी सामान्य बात है।
आदेश की प्रति सभी संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दी गई है ताकि अमल सुनिश्चित हो सके। पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है।
सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।
पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

