ग्राम स्टेन्स हत्याकांड में दारा सिंह की रिहाई याचिका खारिज, सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ़्ते टाल दिया
ओडिशा के राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों की हत्या के लिए उम्रकैद काट रहे दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्णय को चुनौती देने हेतु संशोधन आवेदन की अनुमति दी और मामले की सुनवाई को तीन हफ़्ते तक स्थगित कर दिया। दारा सिंह ने सुधारात्मक न्याय के आधार पर 25 साल से अधिक कारावास के बाद रिहाई की माँग की थी।

सौजन्य से:- Navbharat Times
ओडिशा के ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की याचिका राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने दारा सिंह को इस आदेश को भी चुनौती देने के लिए याचिका में संशोधन की अनुमति दी और सुनवाई तीन सप्ताह टाल दी।
नई दिल्ली: ओडिशा सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह उर्फ रवींद्र कुमार पाल की समयपूर्व रिहाई की मांग राज्य की सजा समीक्षा बोर्ड (राज्य सेंटेंस रिव्यू बोर्ड) ने खारिज कर दी है।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ को ओडिशा सरकार के वकील ने बताया कि राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने 31 अगस्त 2026 को दारा सिंह की रिहाई के लिए दायर क्षमादान/रिमिशन की याचिका पर फैसला करते हुए उसे खारिज कर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई तीन सप्ताह के लिए टाल दी और दारा सिंह को अपनी याचिका में रिमिशन खारिज किए जाने के आदेश को भी चुनौती देने के लिए संशोधन आवेदन दाखिल करने की अनुमति दी।
रिमिशन याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने संशोधन की दी अनुमति
पीठ ने आदेश में कहा, “राज्य ने 31 अगस्त के आदेश के जरिए रिमिशन की याचिका खारिज कर दी है। याचिकाकर्ता के वकील को उचित संशोधन आवेदन दाखिल करने की अनुमति दी जाती है। तीन सप्ताह बाद सूचीबद्ध किया जाए।” इस मामले में पिछली दो सुनवाई के दौरान भी पीठ ने सुनवाई स्थगित की थी, क्योंकि उसे बताया गया था कि रिमिशन की याचिका पर राज्य ने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। पिछली सुनवाई में पीठ ने चेतावनी दी थी कि अगली तारीख तक फैसला नहीं होने पर देरी का कारण जानने के लिए राज्य के सचिव को तलब करने के अलावा उसके पास कोई विकल्प नहीं रहेगा।
25 साल जेल के बाद समयपूर्व रिहाई की मांग, दारा सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई थी गुहार
दारा सिंह ने 2024 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि वह 25 वर्ष से अधिक समय जेल में बिता चुका है, इसलिए उसे समयपूर्व रिहाई का लाभ दिया जाए। उसने सुधारात्मक न्याय के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा था कि वह अपने कृत्य पर पश्चाताप करता है और सुधरे हुए व्यक्ति के रूप में समाज में लौटना चाहता है। दारा सिंह को 2003 में ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी। 2005 में उड़ीसा हाई कोर्ट ने उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में बरकरार रखा था। 22 जनवरी 1999 को ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में ग्राहम स्टेन्स और उनके बेटे फिलिप (10) तथा टिमोथी (6) वाहन में सो रहे थे, तभी दारा सिंह के नेतृत्व वाली भीड़ ने वाहन में आग लगा दी थी।
लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी, नवभारत टाइम्स में लीगल एडिटर हैं। वह 22 साल से भी ज्यादा वर्षों से लीगल रिपोर्टिंग कर रहे हैं। शुरुआत में वह दिल्ली की निचली अदालत और सीबीआई कवर करते थे और बाद में वह दिल्ली हाई कोर्ट और फिर लगातार डेढ़ दशक से सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे हैं। इस दौरान राजेश ने देश के तमाम हाई प्रोफाइल केस नीतीश कटारा मर्डर केस, जेसिक लाल केस, बोफोर्स केस, उपहार केस, पार्लियामेंट अटैक केस, प्रिय दर्शनी मट्टू केस से लेकर तमाम संवैधानिक मसले कवर किए जिनमें अनुच्छेद-370, तीन तलाक, निजता का अधिकार, होमो सेक्सुअलिटी को अपराध से बाहर करने का मामला और राम मंदिर मसले अहम है। राजेश ने इस 22 साल के करियर के दौरान दो साल 2006 से लेकर 2007 के सितंबर तक सहारा समय टीवी चैनल में भी बतौर लीगल संवावददाता काम किया। इसके बाद दोबारा वह नवभारत टाइम्स आए और उसके बाद लगातार कानूनी अफेयर्स को कवर करते रहे। नेशनल ब्यूरो में रहते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्रालय को कवर करने के साथ साथ कानून के विषय पर लगातार एडिट पेज पर लिख रहे हैं। साथ ही लगातार ऑनलाइन माध्यम के लिए भी सक्रिय रिपोर्टिंग करते रहे हैं और ..कोर्ट रूम..नाम के एक साप्ताहिक विडियो इंटरव्यू भी लगातार देते हैं जिनमें सप्ताह भर के मुख्य कानूनी मसले पर उनका साक्षात्कार प्रसारित होता है। इसके अलावा वह लगातार लीगल मसले पर लीगल फोरम नामक कॉलम भी लिखते रहे हैं। उन्होंने दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी किया है। साथ ही उन्होंने जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया और एलएलबी भी कर रखा है।... और पढ़ें
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