भ्रष्टाचार का मामला लंबित होने से विभागीय आरोपपत्र रद्द नहीं हो सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में प्राथमिकी दर्ज होने से विभागीय जांच और आरोपपत्र की कार्रवाई पर रोक नहीं लगती। आपराधिक मामला और विभागीय कार्यवाही दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं और कानून के तहत एक साथ जारी रह सकती हैं। जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल बेंच ने कहा कि सामान्यतः विभागीय कार्यवाही में जारी आरोपपत्र को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती, जब तक यह साबित न हो कि आरोपपत्र जारी करने वाला अधिकारी अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के लिए सक्षम नहीं था। अदालत

सौजन्य से:- लाइव लॉ हिंदी
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राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में प्राथमिकी दर्ज होने से विभागीय जांच और आरोपपत्र की कार्रवाई पर रोक नहीं लगती। आपराधिक मामला और विभागीय कार्यवाही दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं और कानून के तहत एक साथ जारी रह सकती हैं। जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल बेंच ने कहा कि सामान्यतः विभागीय कार्यवाही में जारी आरोपपत्र को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती, जब तक यह साबित न हो कि आरोपपत्र जारी करने वाला अधिकारी अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के लिए सक्षम नहीं था। अदालत
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