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धर्म की आज़ादी का मतलब यह नहीं कि ईसाई समुदाय कब्रिस्तान के लिए ज़मीन का कोई खास टुकड़ा मांग सके: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि धर्म की आज़ादी के अधिकार (जिसमें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार करने का अधिकार भी शामिल है) के तहत किसी समुदाय को कब्रिस्तान बनाने के लिए स्थानीय निकाय की ज़मीन के किसी खास टुकड़े पर दावा करने का अधिकार नहीं मिलता। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने 'क्रिश्चियन कम्युनिटी वेलफेयर सोसाइटी' की रिट याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। सोसाइटी ने गाजियाबाद में बंजर ज़मीन के एक टुकड़े को ईसाई कब्रिस्तान में बदलने की अपनी अर्जी खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि ग्राम सभा

13 अक्टूबर 2026 को 02:53 pm बजे
धर्म की आज़ादी का मतलब यह नहीं कि ईसाई समुदाय कब्रिस्तान के लिए ज़मीन का कोई खास टुकड़ा मांग सके: इलाहाबाद हाईकोर्ट

सौजन्य से:- लाइव लॉ हिंदी

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि धर्म की आज़ादी के अधिकार (जिसमें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार करने का अधिकार भी शामिल है) के तहत किसी समुदाय को कब्रिस्तान बनाने के लिए स्थानीय निकाय की ज़मीन के किसी खास टुकड़े पर दावा करने का अधिकार नहीं मिलता। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने 'क्रिश्चियन कम्युनिटी वेलफेयर सोसाइटी' की रिट याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। सोसाइटी ने गाजियाबाद में बंजर ज़मीन के एक टुकड़े को ईसाई कब्रिस्तान में बदलने की अपनी अर्जी खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि ग्राम सभा

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