बहू को ससुराल में प्रवेश से रोकना और अपमानित करना अपने आप में 'क्रूरता' नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि किसी महिला को उसके वैवाहिक घर में प्रवेश करने से रोकने और उसका अपमान करने के आरोप, मामले की परिस्थितियों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 85 के तहत क्रूरता का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट ने सास और ननद के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए कहा कि उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप संबंधित अपराधों के आवश्यक कानूनी तत्वों को पूरा नहीं करते हैं। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल बेंच भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 528 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई कर रही

सौजन्य से:- लाइव लॉ हिंदी
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झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि किसी महिला को उसके वैवाहिक घर में प्रवेश करने से रोकने और उसका अपमान करने के आरोप, मामले की परिस्थितियों में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 85 के तहत क्रूरता का अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट ने सास और ननद के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द करते हुए कहा कि उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप संबंधित अपराधों के आवश्यक कानूनी तत्वों को पूरा नहीं करते हैं। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल बेंच भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 528 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई कर रही
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