सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आसाराम को जमानत नहीं, मिली ये बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने स्वयंभू बाबा आसाराम को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया, लेकिन 24 घंटे मदद के लिए अपनी पसंद का एक ट्रेंड केयरटेकर रखने की इजाजत दे दी। आसाराम 2013 में एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है।

सौजन्य से:- ETV Bharat
आसाराम को नहीं मिली जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेंड केयरटेकर रखने की इजाजत दी
सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका को लंबित रखा और तबीयत बिगड़ने पर मामले का उल्लेख करने की छूट दी.
By Sumit Saxena
Published : August 6, 2026 at 3:30 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्वयंभू बाबा आसाराम को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया. 2013 में एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के मामले में आसाराम आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. हालांकि, कोर्ट ने उसे 24 घंटे मदद के लिए अपनी पसंद का एक ट्रेंड केयरटेकर रखने की इजाजत दे दी है.
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने आसाराम की याचिका, जिसमें स्वास्थ्य के आधार पर अंतरिम जमानत मांगी गई थी, को लंबित रखा और तबीयत बिगड़ने पर मामले का उल्लेख करने की छूट दी.
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आसाराम ने कोर्ट से यह बात छिपाई कि उसके वकील ने पैरोल के लिए अर्जी दी है. आसाराम के वकील ने कहा कि पैरोल अर्जी बहुत पहले दी गई थी और स्वास्थ्य कारणों से इसे मंजूर नहीं किया गया था.
अगस्त महीने की शुरुआत में, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि आसाराम को बीमारियों के लिए अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है, हालांकि उसे चौबीसों घंटे मदद की आवश्यकता है. पीठ ने रिपोर्ट देखने के बाद कहा था कि वह 6 अगस्त को आसाराम की मेडिकल आधार पर जमानत याचिका पर सुनवाई करेगी.
रिपोर्ट की जांच करने के बाद पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि पहले भाग में कहा गया है कि अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है. पीठ ने कहा कि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उसे चौबीसों घंटे चिकित्सा ध्यान देने की आवश्यकता है.
21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS के निदेशक से आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड बनाने को कहा था, क्योंकि स्वयंभू बाबा ने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत मांगी थी. पीठ ने मेडिकल बोर्ड से एक हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देने को कहा था. 27 मई को राजस्थान उच्च न्यायालय ने 2013 में एक नाबालिग से रेप के मामले में दोषी 80 साल के आसाराम को मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था.
पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सिर्फ तीन महीने पहले आसाराम ने काशी विश्वनाथ और अयोध्या की यात्रा की थी. मेहता ने जोर देकर कहा कि उन्हें जमानत इस आधार पर मिली थी कि वह अचेतन अवस्था (Vegetative State) में थे. मेहता ने आगे कहा, "लेकिन अब वह घूम रहे हैं."
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह नियमित जमानत तब तक नहीं दे रहा है जब तक कोर्ट को यह भरोसा न हो कि मेडिकल आधार पर इसकी जरूरत है. पीठ ने कहा कि वह मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट देखेगी. आसाराम के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल का केस AIIMS के डायरेक्टर को भेजा जाना चाहिए. वकील ने जोर देकर कहा कि डायरेक्टर गहन जांच के लिए डॉक्टरों की एक टीम बना सकते हैं.
वकील ने आगे तर्क दिया कि डॉक्टर तब इस बारे में एक रिपोर्ट जमा कर सकते हैं कि उसे मरीज के तौर पर भर्ती किया जाना चाहिए या नहीं.
राजस्थान उच्च न्यायालय ने मामले में आसाराम की दोषसिद्धि को बरकरार रखा था, लेकिन उसे तत्कालीन भारतीय दंड संहिता और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत एक बच्ची के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और पेनिट्रेटिव यौन उत्पीड़न से संबंधित आरोपों से बरी कर दिया था.
हालांकि, उच्च न्यायालय ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म से संबंधित आईपीसी की धारा 376(2)(F) के तहत आसाराम की दोषसिद्धि को बरकरार रखा, जिससे ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा बरकरार रही.
यह भी पढ़ें- आसाराम को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं, लेकिन 24 घंटे मदद की आवश्यकता: एम्स ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
दिल्ली हाई कोर्ट का सवाल: सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद भी क्यों नहीं हुई आरोपी की गिरफ्तारी?

विधिक शिक्षा के प्रसार के लिए नए कानूनी ढांचे की आवश्यकता

तरुण तेजपाल को 2013 के बलात्कार मामले में दोषी ठहराने का निर्णय बरी करने के फैसले को पलट गया

आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं, लेकिन मिली केयरटेकर रखने की अनुमति

तरुण तेजपाल मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला: बलात्कार पीड़ितों के प्रति अदालतों की सोच में बदलाव की जरूरत

देवरिया हत्याकांड में माता-पिता व पुत्र को आजीवन सजा

लखीमपुर खीरी हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने से जुड़ी शर्तों में ढील देने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, आरोपी को जमानत पर रिहा करने के कहा - जाने चाहिए कि क्यों नहीं?
ताज़ा ख़बरें
- बॉम्बे हाई कोर्ट ने तरुण तेजपाल को 10 साल की जेल की सजा सुनाई
- महाराष्ट्र में नए धर्मांतरण विरोधी कानून के लिए ईसाई नेताओं में गंभीर चिंता
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बढ़ जाएगी गाड़ी खरीदने की लागत
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला: वाहन की नंबर प्लेट छिपाना धोखाधड़ी नहीं, मोटरवाहन अधिनियम का उल्लंघन
- सुप्रीम कोर्ट में तरुण तेजपाल की अपील: यौन उत्पीड़न मामले में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती
- हाईकोर्ट का फैसला: पत्रकार तरुण तेजपाल को यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया, 10 साल की जेल
- सुप्रीम कोर्ट ने 2 लाख भारतीयों को प्रभावित करने वाले मेडिकल डेटा उल्लंघन की सीबीआई जांच की मांग की
- सुप्रीम कोर्ट में मध्यस्थता प्रक्रिया से परिवार के सदस्यों को मिली उम्मीद

