सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 'नो इंश्योरेंस-नो तेल' नीति के लिए 'थर्ड पार्टी इंश्योरेंस' की समय सीमा बढ़ाई
सुप्रीम कोर्ट ने थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की समय सीमा बढ़ाकर चार साल कारों औरछह साल दोपहिया वाहनों के लिए देने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने 'नो इंश्योरेंस नो तेल' नीति लागू करने का प्रस्ताव दिया है. जिससे देश में 16.54 करोड़ बिना इंश्योरेंस के चलने वाले वाहनों पर बीमा कराने का प्रेशर बढ़ेगा

सौजन्य से:- ETV Bharat
Explainer: 'नो इंश्योरेंस-नो तेल', एक क्लिक में जानें आखिर क्यों सुप्रीम कोर्ट ने दिया यह निर्देश
देश में कुल रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या 30.48 करोड़ हैं, जिसमें से करीब 56 फीसदी यानी 16.54 वाहन बिना इंश्योरेंस के फर्राटा भर रहे हैं.
Published : August 9, 2026 at 12:35 PM IST
हैदराबाद: देश की सर्वोच्च अदालत ने नई कारों के लिए थर्ड पार्टी मोटर व्हीकल इंश्योरेंस (Third Party Vehicle Insurance) की समय सीमा बढ़ाकर चार साल दी है. वहीं, नए टू-व्हीलर्स के लिए यही सीमा अब छह साल करने का निर्देश दिया है.
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को भी निर्देश देते हुए कहा कि गाड़ियों को इंश्योरेंस स्टेटस से जोड़ने वाला एक पायलट प्रोजेक्ट बनाया जाए. इस प्रोजेक्ट की सहायता से देश के पेट्रोल पंप पर गाड़ियों का वैध थर्ड पार्टी इंश्योरेंस चेक किया जा सके. जानकारी के मुताबिक नेशनल इंश्योरेंस कंपनी केस की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 'नो इंश्योरेंस नो तेल' नीति लागू करने का प्लान दिया. इससे देश की करीब 16.54 करोड़ बिना इंश्योरेंस की चलने वाले वाहनों पर बीमा कराने का प्रेशर बनेगा.
सुप्रीम कोर्ट तेलंगाना हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर हुई याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बीमा हुए वाहन में सफर कर रहे मालिक की मौत के बाद मुआवजे का विवाद खड़ा हो गया था.
इस कानून का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों के पीड़ितों को मुआवजा दिलाना और कानूनी झंझटों से मुक्ति दिलाना है. जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक भविष्य में पेट्रोल पंप और राजमार्ग के एएनपीआर (ANPR) कैमरों को बीमा डेटाबेस से जोड़ा जाएगा.
नियम बदलने की जरुरत क्यों पड़ी
सुप्रीम कोर्ट ने संसदीय समिति कि रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए दुख व्यक्त किया. कोर्ट ने बताया कि हमारे देश में कुल रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या 30.48 करोड़ हैं, जिसमें से करीब 56 फीसदी यानी 16.54 वाहन बिना इंश्योरेंस के फर्राटा भर रहे हैं. इनमें दोपहिया वाहन सबसे ज्यादा हैं. सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में सड़क हादसों की वजह यही वाहन होते हैं, जो 22 फीसदी के करीब है.
कोर्ट ने थर्ड पार्टी इंश्योरेंस पर दिया बयान
सुप्रीम कोर्ट ने थर्ड पार्टी इंश्योरेंस को लेकर निर्देश दिया कि इरडा (IRDA) इसकी समय सीमा बढ़ाए. नए नियमों के मुताबिक नए चार पहिए वाहनों के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की समय सीमा 3 साल से बढ़ाकर 4 साल और दोपहिए वाहनों के लिए यही अवधि 5 साल से बढ़ाकर 6 साल का प्रस्ताव दिया गया है.
अब जानिए क्या होता है थर्ड और कंप्रिहेंसिव बीमा
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के मुताबिक देश की सड़कों पर वाहन चलाने के लिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस कानूनी तौर पर अनिवार्य है. थर्ड पार्टी का यहां मतलब उस तीसरे शख्स से है जो आपके वाहन से किसी दुर्घटना का शिकार हुआ है. बता दें, अगर आपके वाहन से किसी दूसरे शख्स की मृत्यु या गंभीर रूप से घायल हो जाता है, या उसके वाहन को क्षति पहुंचती है, तो उसका मुआवजा इंश्योरेंस कंपनी भरती है. वहीं, संपत्ति के क्षतिग्रस्त होने पर करीब 7.5 लाख रुपये और शारीरिक अक्षमता होने पर करीब 15 लाख रुपये का बीमा मिलता है.
यह भी जानें
यहां यह भी जानना जरूरी है कि थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में आपकी गाड़ी के नुकसान या चोरी होने पर कोई कवर नहीं मिलता. इसके लिए सभी को कंप्रिहेंसिव बीमा (Comprehensive Insurance) लेना पड़ता है. इस बीमे के तहत थर्ड पार्टी और अपना वाहन दोनों के नुकसान की भरपाई होती है.
अब जानिए कैसे काम करेगी नो इंश्योरेंस-नो तेल तकनीकि और एएनपीआर (ANPR) कैमरे
देश की राजधानी नई दिल्ली मे तमाम पेट्रोल पंप पर ऐसे स्मार्ट कैमरे लगाए जा चुके हैं. ये कैमरे पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) वाले वाहनों को तेल देने से रोक देते हैं. वहीं, अब इस तकनीकि का प्रयोग इंश्योरेंस की जांच के लिए भी किया जाएगा.
जानिए कैसे लिंक होंगे पेट्रोल पंप
सड़क परिवहन मंत्रालय के 'वाहन पोर्टल' और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के डेटाबेस से सारे पेट्रोल पंप को ऑनलाइन जोड़ा जाएगा. जैसे ही कोई वाहन पेट्रोल पंप पहुंचेगा, उसकी नंबर प्लेट स्कैन होगी. यदि इंश्योरेंस एक्सपार्यड होगा तो पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा.
क्या होता है एएनपीआर कैमरे (ANPR) कैमरे
राजमार्ग और तमाम सड़कों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्रिशन (ANPR) कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को मंत्रालय के वाहन पोर्टल से मिलाएंगे. बिना इंश्योरेंस वाले वाहन जैसे ही कैमरे की निगाह में आएंगे, वैसे ही ई-चालान जेनरेट होगा और वाहन स्वामियों के मोबाइल पर भेज दिया जाएगा. इसके साथ ट्रैफिक पुलिस को भी कुछ ऐसी ही डिवाइस दिए जाएंगे, जो मौके पर ही वाहनों के इंश्योरेंस का स्टेटस चेक कर लेंगे. जानकारी के मुताबिक इस महीने से ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्रिशन (ANPR) कैमरों को इंश्योरेंस डेटाबेस से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
जानें क्या है मोटर वाहन अधिनियम की धारा 196 और क्या है सजा
देश में सड़क सुरक्षा और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा के लिए मोटर वाहन अधिनियम 1988 (संशोधित 2019) की धारा 146 के मुताबिक हर वाहन का कम से कम थर्ड पार्टी इंश्योरेंस होना जरूरी है. इस नियम की अवहेलना करने पर धारा 196 के तहत सजा का प्रावधान है. यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि दुर्घटना के समय तीसरे पक्ष को कंपनी की तरफ से नुकसान की भरपाई हो.
क्या है पेनाल्टी का झोल
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 196 के तहत कोई वाहन स्वामी पहली बार और कई बार नियम तोड़ता है तो उसके खिलाफ अलग-अलग सजा का प्रावधान है.
पहली बार नियम तोड़ने पर
यदि कोई शख्स पहली बार बिना थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के वाहन चलाता है तो उस पर 2 हजार रुपये का नकद जुर्माना लगाया जाता है या 3 महीने तक की जेल भी हो सकती है. वहीं, कोर्ट कई मामलों में दोनों सजा भी दे सकती है.
दूसरी बार या कई बार नियम तोड़ने पर
कोई शख्स दूसरी बार या बार-बार यह नियम तोड़ता है तो जुर्माने बढ़कर 4 हजार रुपये हो जाता है. इसके साथ-साथ 3 महीने की जेल की सजा भी दी जा सकती है. इसका सीधा मतलब यह है कि सभी वाहन ओनर कम से कम थर्ड पार्टी इंश्योरेंस करवाएं और समय सीमा समाप्त होने पर उसे रिन्यूल भी करवाएं. वरना जुर्माना भरने के लिए तैयार रहें.
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
केवल सरकारी पोर्टल का ही प्रयोग करें
वाहन स्वामी हमेशा अपने वाहन का इंश्योरेंस का स्टेटस चेक करने के लिए भारत सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकृत सरकारी पोर्टल 'mParicavan' ऐप या फिर 'vahan.parivahan.gov.in' पोर्टल की ही प्रयोग करें.
फ्रॉड से बचें
वाहन स्वामी फर्जी इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने वालों से बचकर रहें. ऐसे मैसेड और ऐप से दूर रहें. कभी भी अपनी गोपनीय डिटेल्स किसी को भी शेयर मत करें. हमेशा समयसीमा समाप्त होने से कुछ दिनों पहले ही इंश्योरेंस को रिन्यू करवा लें. एक बात का ध्यान रखें कि पर्सनल एक्सीडेंट कवर जरूर लें. इसके साथ-साथ पॉलिसी कॉपी को हमेशा अपने मोबाइल में सेव रखें.
पढ़ें: कारों के लिए 4, दोपहिया-वाहनों के लिए 6 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य, SC का निर्देश
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