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दिल्ली हाई कोर्ट का सवाल: सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद भी क्यों नहीं हुई आरोपी की गिरफ्तारी?

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बावजूद एक आरोपी को गिरफ्तार न करने पर दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। आरोपी मनोज कुमार झा पर कई संगीन अपराधों के आरोप हैं और उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है।

6 अगस्त 2026 को 11:16 pm बजे
दिल्ली हाई कोर्ट का सवाल: सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद भी क्यों नहीं हुई आरोपी की गिरफ्तारी?

सौजन्य से:- Jagran

दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर हाई कोर्ट का सवाल, सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज फिर भी गिरफ्तारी नहीं

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बावजूद एक शातिर आरोपी मनोज कुमार झा को गिरफ्तार न करने पर दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली ...और पढ़ें

HighLights

- सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने पर भी गिरफ्तारी नहीं।

- दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

- आरोपी मनोज कुमार झा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की गई।

विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। संगीन अपराधों में शामिल शातिर आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली पुलिस की सजगता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बावजूद भी पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

अब दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया है। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने कहा कि मुझे इस बात पर भी हैरानी है कि सुप्रीम कोर्ट तक अग्रिम जमानत की कई अर्जियां खारिज होने के बावजूद, स्थानीय पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

पीठ ने यहां तक कहा कि इससे ऐसा लगता है कि आरोपित की मदद की जा रही है और यह मामला जैसा दिखता है, उससे कहीं ज्यादा कुछ और भी है। उक्त टिप्पणियों के साथ अदालत ने सरकारी अधिकारी बनकर गोपनीय दस्तावेज हासिल करने से लेकर पटना हाई कोर्ट का जज बताकर ठगी करने के आरोपित मनोज कुमार झा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

पीठ ने कहा कि आरोपों की प्रकृति और आरोपित के आदतन अपराधी होने के तथ्य को देखते हुए कि अदालत को सख्त नियमों का पालन करना होगा। पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे अग्रिम जमानत देने के लिए उपयुक्त मामला नहीं माना था और किसी भी स्थिति में शीर्ष अदालत के आदेश के बाद से स्थिति मेें कोई बदलाव नहीं आया है।

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अदालत ने यह भी रिकॉर्ड पर लिया कि आरोपित के खिलाफ संसद मार्ग थाना के अलावा पंजाब, चंड़ीगढ़, गुरुग्राम, बिहार और हरियाणा में धोखाधड़ी, जानसाजी, हत्या का प्रयास, मारपीट, धमकी देने सहित अन्य धाराओं में कुल 11 प्राथमिकी हुई हैं।

सुनवाई के दौरान पेश हुए अतिरिक्त लोक अभियोजक अमित अहलावत ने भी आरोपित को गिरफ्तार करने के लिए कोई कदम नहीं उठाने पर चिंता जताई।

आरोपित ने पुलिस की इसी लापरवाही का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत की मांग की थी। आरोपित ने तर्क दिया था कि 2024 मेें अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के साथ ही आठ सितंबर 2025 में शीर्ष अदालत द्वारा अग्रिम जमानत के लिए दायर विशेष अनुमति याचिका खारिज होने के बावजूद भी उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। इससे पता चलता है कि उसे हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है।

आरोपित पर सरकारी अधिकारी बनकर कई वरिष्ठ अधिकारियों से संवेदनशील और गोपनीय जानकारी हासिल करने का आरोप है। इतना ही नहीं गुरुग्राम के शिवाजी नगर थाने में हुई एक प्राथमिकी के अनुसार आरोपित मनोज कुमार झा ने खुद की पहचान पटना हाई कोर्ट का जज बीके झा बताई थी। इसके अलावा हरियाणा, पंजाब और चंड़ीगढ़ में आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

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