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झीरम नक्सल अटैक केस: आखिरी फेज में पहुंची अदालत की सुनवाई

झीरम नक्सली हमले के मामले में अदालती कार्यवाही अब अपने आखिरी फेज में पहुंच गई है. 10 अगस्त को होगी अंतिम बहस, जिसके बाद न्यायालय अपना फैसला सुरक्षित रख सकता है. इस केस में 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चल रहा है.

8 अगस्त 2026 को 04:15 pm बजे
झीरम नक्सल अटैक केस: आखिरी फेज में पहुंची अदालत की सुनवाई

सौजन्य से:- ETV Bharat

झीरम नक्सल अटैक केस, आखिरी फेज में पहुंची अदालत की सुनवाई, 10 अगस्त को होगी अंतिम बहस

झीरम नक्सली हमला केस में सुनवाई का अंतिम दौर सामने आ चुका है. सुनील कश्यप की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : August 8, 2026 at 8:55 PM IST

जगदलपुर: झीरम नक्सल हमले पर अदालती कार्यवाही अब अपने आखिरी फेज में पहुंच गई है. लंबे समय से एनआईए कोर्ट इस केस पर बहस चल रही है. अब इस केस में आगामी 10 अगस्त को अंतिम बहस निर्धारित की गई है. इसके बाद एनआईए कोर्ट अपना फैसला सुरक्षित रख सकता है. कोर्ट इस केस में फैसले की तिथि घोषित कर सकता है.

झीरम नक्सल हमला, 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई

इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चल रहा है. इनमें से एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है. जबकि शेष आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में सुनवाई जारी है. मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए 101 गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए हैं. गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अब मामला अंतिम बहस के चरण में पहुंच गया है.

10 अगस्त को होगी अंतिम बहस

10 अगस्त को होने वाली अंतिम बहस के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष अपने-अपने अंतिम तर्क न्यायालय के समक्ष रखेंगे. इसके बाद सभी की नजरें न्यायालय के फैसले पर टिकी रहेंगी. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय कितने आरोपियों को दोषी ठहराता है. और कितनों को राहत मिलती है.

13 वर्षों का इंतजार होगा खत्म

झीरम घाटी नक्सली हमला छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में गिना जाता है. इस प्रकरण की सुनवाई पर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश की नजर बनी हुई है. शासन की ओर से इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश पाणिग्रही पैरवी कर रहे हैं. अब अंतिम बहस के बाद आने वाला न्यायालय का फैसला इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करेगा. बीते 13 वर्षो से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे लोगों की उम्मीदों पर भी इसका असर पड़ेगा.

गौरतलब है कि 25 मई 2013 के दिन कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से सभा करके वापस जगदलपुर लौट रही थी. इसी दौरान दोपहर के करीब 2-3 बजे घाटी में घात लगाए माओवादियों ने कांग्रेस के काफिले पर जमकर गोलियां बरसाई थी. माओवादियों के इस हमले में कांग्रेस की एक पीढ़ी समाप्त हो गई थी. तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा सहित अन्य बड़े कांग्रेसी नेताओं को नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया. इनके अलावा सुरक्षाबल के जवान और आम नागरिक मारे गए थे.

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