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सीईसी की आजीवन प्रतिरक्षा: जवाबदेही से दूर एक खतरनाक कदम

The New Indian Express के अनुसार · 24x7 NYAYA
सीईसी की आजीवन प्रतिरक्षा: जवाबदेही से दूर एक खतरनाक कदम
प्रतीकात्मक चित्र · सौजन्य: Unsplash

नवीन 2023 के अधिनियम से मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) व अन्य आयुक्तों को आपराधिक कार्यवाही से आजीवन सुरक्षा मिली है, जबकि अन्य संवैधानिक पदों को ऐसी असीमित छूट नहीं है। यह सुरक्षा दो कारणों से दी गई हो सकती है—स्वतंत्र चुनाव संचालन की आवश्यकता और राजनीतिक स्वार्थों की सुरक्षा। हाल ही में सीईसी के एकतरफ़ा निर्णयों ने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव कर सार्वजनिक नाराज़गी बढ़ा दी है, जिससे इस प्रतिरक्षा को चुनौती देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा दायर है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलीलें रखीं, जबकि सरकार ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया। पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।

कानूनी जानकारों के अनुसार इस व्यवस्था का दूरगामी असर पड़ सकता है और यह भविष्य के मामलों के लिए नज़ीर बनेगी। मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी गई है, जहाँ शेष बिंदुओं पर विचार होगा।

पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियागत निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी।

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दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट में भ्रष्ट जजों की गिनती भूलने का आरोप लगाया

दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट में भ्रष्ट जजों की गिनती भूलने का आरोप लगाया

वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, कार्यपालिका के बढ़ते दखल और जजों में सामाजिक विविधता की कमी को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में भ्रष्ट जजों की गिनती को नजरअंदाज़ किया जा रहा है और इस पर जवाबदेही की मांग की।

पीठ ने कहा कि कानून का उद्देश्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

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सुप्रीम कोर्ट में आज हो सकती है जम्मू‑कश्मीर के राज्य दर्जे पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की जूरी में आज जहीर अहमद भट बनाम भारत संघ के मामले में जम्मू‑कश्मीर के राज्य दर्जे को बहाल करने पर सुनवाई हो सकती है। 2025 के ऑक्टूबर में हुई पूर्व सुनवाई के बाद अदालत ने सॉलिसिटर जनरल को चार सप्ताह के भीतर दलीलों के प्रति उत्तर देने का समय दिया था। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि विधानसभा चुनाव शांतिपूर्वक हो चुके हैं, सरकार बनी है, और प्रगति हुई है, परन्तु निर्णय लेने से पहले हालिया घटनाओं पर भी विचार करना आवश्यक है।

सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अदालत ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश पारित किया।

मुकदमे

ECI के दावे पर संदेह: क्या सुप्रीम कोर्ट ने नया फॉर्म‑6 घोषणा मंज़ूर किया?

ईसीआई ने हाल ही में प्रेस में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म‑6 में शामिल नई घोषणा को मान्यता दी है। परंतु अदालत ने केवल SIR के सामान्य प्राधिकरण को स्वीकार किया, और उस विशेष घोषणा पर चर्चा नहीं की। इसलिए ECI का यह दावा गलत ठहर सकता है।

विशेषज्ञों ने इस निर्णय को संतुलित बताते हुए कहा कि इससे लंबित विवादों के निपटारे में मदद मिलेगी। सरकार ने भरोसा दिलाया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

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